MP Rajya Sabha Elections: मध्य प्रदेश कोटे की तीन राज्यसभा सीटों के लिए जून में होने वाले चुनाव ने प्रदेश में राजनैतिक सरगर्मियों को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। संख्या बल के लिहाज से विपक्ष में बैठी कांग्रेस के पाले में महज एक सीट आती दिख रही है, लेकिन इस इकलौती सीट के दावेदारों की लंबी लिस्ट ने पार्टी आलाकमान के सामने बड़े धर्मसंकट में खड़ा कर दी है।
दिग्गी की पैरवी शुरू
इस बीच, कांग्रेस के अंदर एक नया सियासी मोड़ तब आया जब पार्टी के कुछ कद्दावर नेताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को ही दोबारा राज्यसभा भेजने की पैरवी शुरू कर दी है, जबकि खुद दिग्विजय सिंह सार्वजनिक रूप से इस बार चुनाव न लड़ने की घोषणा कर चुके हैं।
पूर्व मंत्री पीसी शर्मा का बड़ा दांव
दिग्विजय सिंह के समर्थक और पूर्व कैबिनेट मंत्री पीसी शर्मा ने एक बड़ा बयान देकर कांग्रेस में हलचल पैदा कर दी है। पीसी शर्मा ने मांग उठाई है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस की वर्तमान परिस्थितियों और भाजपा की घेराबंदी को देखते हुए, देश की संसद में मजबूती से आवाज उठाने के लिए दिग्विजय सिंह से बेहतर कोई चेहरा नहीं हो सकता। पार्टी हाईकमान को उनके नाम पर दोबारा विचार करना चाहिए। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को दिल्ली दरबार से इस विषय पर चर्चा करनी चाहिए।
हालांकि, जब पीसी शर्मा से पूछा गया कि दिग्विजय सिंह तो खुद मना कर चुके हैं और पूर्व सीएम कमलनाथ भी इस रेस में हैं, तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह और कमलनाथ जैसे कद्दावर नेता अपने भविष्य का फैसला स्वयं करने में पूरी तरह सक्षम हैं।
कमलनाथ का पलड़ा भारी
राजनैतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि दिग्विजय सिंह अपने फैसले पर अडिग रहते हैं, तो पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम इस समय सबसे ज्यादा मजबूत और शीर्ष पर चल रहा है। कमलनाथ दिल्ली की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ के दम पर इस सीट को अपने पाले में लाना चाहते हैं। लेकिन उनके अलावा भी कई नेता रेस में अपनी गोटियां फिट करने में जुटे हैं। जिनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी नटराजन, सज्जन सिंह वर्मा और पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल का नाम चर्चा में बना हुआ है।







