भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में लंबे समय से अटकी निगम-मंडलों, विकास प्राधिकरणों और विभिन्न बोर्डों में राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा संगठन के बीच कई दौर की बैठकों और मंथन के बाद करीब 14 से 15 नामों पर लगभग सहमति बनने की चर्चा है। इनके पीछे राजनीतिक, सामाजिक और जातीय समीकरणों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, चूकि दतिया उपचुनाव की हाल में ये फैक्टर बेहद ही खासतौर पर उभरकर सामने आया है।
सबसे ज्यादा इन जिलों पर नजर
सत्ता और संगठन से जुड़े सूत्रों का दावा है कि संभावित नामों का पैनल तैयार कर लिया गया है और केंद्रीय तथा प्रदेश नेतृत्व के स्तर पर अंतिम सहमति के बाद नियुक्तियों की घोषणा का सिलसिला शुरू हो सकता है। हालांकि, अभी तक सरकार या भाजपा संगठन की ओर से किसी भी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। प्रदेश की राजनीति में सबसे ज्यादा नजर इंदौर, भोपाल और जबलपुर विकास प्राधिकरण सहित पर्यटन, औद्योगिक, खनिज, बीज एवं फार्म विकास निगम और विभिन्न बोर्डों की नियुक्तियों पर टिकी हुई है।
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विकास प्राधिकरणों में इन नामों की चर्चा
इंदौर विकास प्राधिकरण में कई दावेदार
इंदौर विकास प्राधिकरण में नियुक्ति को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई नामों की चर्चा तेज है। सूत्रों के मुताबिक, कैलाश विजयवर्गीय के राजनीतिक खेमे से हरिनारायण यादव का नाम प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है। इसके अलावा कमलेश शर्मा, पूर्व विधायक जीतजिराती, गोपीकृष्ण नेमा, टीनू जैन और मुकेश राजावत के नामों पर भी संगठन स्तर पर विचार-विमर्श होने की चर्चा है। अंतिम फैसला क्षेत्रीय और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर किया जा सकता है।
भोपाल विकास प्राधिकरण के लिए मंथन जारी
भोपाल विकास प्राधिकरण में नियुक्ति को लेकर भी पार्टी और सरकार स्तर पर मंथन जारी बताया जा रहा है। भाजपा संगठन से जुड़े सुमित पचौरी, सत्यार्थ अग्रवाल और रामदयाल प्रजापति के नाम संभावित दावेदारों के रूप में चर्चा में हैं। वहीं, विधायक भगवानदास सबनानी का नाम भी राजनीतिक हलकों में संभावित दावेदारों में शामिल बताया जा रहा है।
जबलपुर विकास प्राधिकरण में स्थानीय समीकरण अहम
जबलपुर विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी को लेकर भी स्थानीय राजनीतिक समीकरण महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इस पद के लिए पूर्व महापौर प्रभात साहू, जीएस ठाकुर और अंचल सोनकर के नाम राजनीतिक गलियारों में चर्चा में हैं। इसके अलावा पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता शरद जैन से जुड़े समर्थक खेमे से भी कुछ नामों पर विचार किए जाने की चर्चा है।
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उज्जैन, ग्वालियर विकास प्राधिकरण में हुई नियुक्ति
उधर, उज्जैन विकास प्राधिकरण में डॉ. रविंद्र सोलंकी और ग्वालियर विकास प्राधिकरण में मधुसूदन भदौरिया की नियुक्तियां पहले ही हो चुकी हैं। इसके बाद अब इंदौर, भोपाल और जबलपुर समेत अन्य महत्वपूर्ण विकास प्राधिकरणों में होने वाली नियुक्तियों पर राजनीतिक हलकों की नजर टिकी हुई है।
पर्यटन विकास निगम के लिए कई बड़े नाम
मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम की कमान किसे सौंपी जाएगी, इसे लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। संभावित नामों में पूर्व मंत्री इमरती देवी, शैलेंद्र जैन और यशवंत सिंह सिसोदिया का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। प्रदेश में पर्यटन और निवेश की नई संभावनाओं को देखते हुए इस निगम की नियुक्ति को सरकार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
औद्योगिक विकास निगम के लिए अनुभवी नेताओं की चर्चा
मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम में नियुक्ति के लिए अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी देने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, ओमप्रकाश सखलेचा और भूपेंद्र सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं के नामों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा है। औद्योगिक निवेश, नए प्रोजेक्ट और प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने की सरकार की प्राथमिकताओं को देखते हुए इस पद के लिए ऐसे चेहरे की तलाश की जा रही है, जिसकी प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर मजबूत पकड़ हो।
खनिज विकास निगम में इन नेताओं के नाम चर्चा में
खनिज विकास निगम की जिम्मेदारी के लिए लाल सिंह आर्य, अजयप्रताप सिंह और राजवर्धन सिंह दत्तीगांव के नाम संभावित दावेदारों में शामिल बताए जा रहे हैं। प्रदेश के महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों और इस क्षेत्र से जुड़े आर्थिक हितों को देखते हुए इस निगम की नियुक्ति भी राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है।
बीज एवं फार्म विकास निगम के लिए किसान नेताओं पर नजर
बीज एवं फार्म विकास निगम की जिम्मेदारी के लिए कृषि और किसान राजनीति से जुड़े नेताओं को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, दर्शन सिंह चौधरी, पूर्व कृषि मंत्री कमल पटेल और रणवीर सिंह रावत के नामों पर विचार किए जाने की चर्चा है। सरकार इस नियुक्ति के जरिए किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में अपने राजनीतिक एवं संगठनात्मक समीकरणों को मजबूत करने की कोशिश कर सकती है।
केश कला बोर्ड में जमना सेन और राजेश्वर सेन का नाम आगे
केश कला बोर्ड के लिए भी दो नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं। इनमें जमना सेन का नाम मजबूत दावेदारों में बताया जा रहा है। वे पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में मंत्री प्रतिनिधि के रूप में भी सक्रिय हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा संगठन से लंबे समय से जुड़े होने तथा समाज में सक्रिय भूमिका के कारण उनके नाम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं राजेश्वर सेन का नाम भी संभावित नियुक्ति के लिए चर्चा में है। उन्हें कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के समर्थक खेमे से प्रभावशाली नेता माना जाता है। संगठन और सामाजिक स्तर पर उनकी सक्रियता के चलते उनका दावा भी मजबूत बताया जा रहा है।
माटी कला बोर्ड में रामदयाल प्रजापति का दावा मजबूत
माटी कला बोर्ड की जिम्मेदारी के लिए रामदयाल प्रजापति का नाम सबसे प्रमुख दावेदारों में बताया जा रहा है। वे पूर्व में माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके हैं और प्रजापति समाज में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। पूर्व कार्यकाल के अनुभव और सामाजिक समीकरणों को देखते हुए उनके नाम पर दोबारा विचार किए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, रामदयाल प्रजापति का नाम भोपाल विकास प्राधिकरण के संभावित दावेदारों में भी चर्चा में है, ऐसे में अंतिम निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा कि उन्हें किस जिम्मेदारी के लिए चुना जाता है।
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14 से 15 नियुक्तियों से शुरू हो सकता है पहला चरण
सूत्रों के मुताबिक, सरकार सभी रिक्त राजनीतिक पदों पर एक साथ नियुक्तियां करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से घोषणा कर सकती है। पहले चरण में करीब 14 से 15 महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां किए जाने की संभावना है। इन नियुक्तियों में क्षेत्रीय संतुलन के साथ-साथ जातीय, सामाजिक और संगठनात्मक समीकरणों को भी ध्यान में रखा जा रहा है। मालवा-निमाड़, बुंदेलखंड, महाकौशल, विंध्य और ग्वालियर-चंबल अंचल के नेताओं को प्रतिनिधित्व देने की कवायद चल रही है।
अंतिम सूची पर सबकी नजर
निगम-मंडलों में राजनीतिक नियुक्तियां भाजपा के उन नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण हैं, जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहने के बावजूद किसी बड़ी जिम्मेदारी का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में नियुक्तियों की यह सूची केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इसके जरिए पार्टी आगामी राजनीतिक समीकरणों को भी साधने की कोशिश करेगी। फिलहाल सभी की निगाहें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। यदि संगठन और सरकार के बीच नामों पर अंतिम सहमति बन जाती है, तो मध्यप्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों का लंबा इंतजार जल्द समाप्त हो सकता है।
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