भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर एक बार फिर हलचल बढ़ गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच हुई चर्चा के बाद लंबे समय से रिक्त पड़े निगम, मंडल, आयोग और विभिन्न प्राधिकरणों के पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया आगे बढ़ने के संकेत मिले हैं। अब संगठन और सरकार स्तर पर संभावित नामों को लेकर मंथन तेज होने की संभावना है।
40 से अधिक संस्थाओं में नियुक्तियों का इंतजार
प्रदेश में इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर विकास प्राधिकरण के साथ ही बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण समेत कई निगम, मंडल, आयोग और प्राधिकरणों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य पद खाली हैं। सामाजिक और विभिन्न वर्गों से जुड़े बोर्डों में भी कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां लंबे समय से लंबित हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश में 40 से अधिक निगम, मंडल, आयोग और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियां की जानी हैं। इन पदों पर नियुक्ति के दौरान क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक समीकरण और पार्टी के भीतर विभिन्न नेताओं के योगदान को ध्यान में रखा जा सकता है।
चुनाव हार चुके वरिष्ठ नेताओं को मिल सकती है जिम्मेदारी
भाजपा के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विधानसभा चुनाव हार चुके कुछ वरिष्ठ पूर्व विधायकों और नेताओं को भी निगम-मंडलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी या दर्जा प्राप्त मंत्री का अवसर मिल सकता है। इसके जरिए पार्टी उन नेताओं को नई भूमिका देने के साथ आगामी राजनीतिक तैयारियों में सक्रिय रखने की रणनीति पर काम कर सकती है।
शक्ति प्रदर्शन के बाद थम गई थी प्रक्रिया
बताया जाता है कि कुछ समय पहले राजनीतिक नियुक्तियों की सूची लगभग तैयार हो चुकी थी, लेकिन एक घटनाक्रम के बाद इस प्रक्रिया को रोक दिया गया था। मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष सौभाग्य सिंह के शक्ति प्रदर्शन को संगठन ने गंभीरता से लिया था। उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और सरकार की ओर से उनके अधिकारों पर भी कार्रवाई की गई। इसके बाद मुख्यमंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने एक दर्जन से अधिक निगम-मंडलों में प्रस्तावित नियुक्तियों को फिलहाल रोकने का निर्णय लिया था। उस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह स्पष्ट संदेश दिया था कि पद और जिम्मेदारी मिलने के बाद अनुशासनहीनता या अहंकार को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बाद जारी हो सकती है सूची
भाजपा सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की कार्यकारिणी से जुड़े फैसले और संगठनात्मक प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों की राह साफ हो सकती है। यह भी चर्चा है कि संगठन और सरकार की जिम्मेदारियों में संतुलन बनाए रखने के लिए एक ही नेता को दोनों स्तरों पर पद देने से बचा जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच बनी नई सहमति के बाद अब भाजपा नेताओं की नजर राजनीतिक नियुक्तियों की पहली सूची पर टिकी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में निगम-मंडलों और अन्य संस्थाओं में नई नियुक्तियों को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है।
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