मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार ने एक बार फिर बड़ा कर्ज लेने का फैसला किया है. राज्य सरकार इस बार 2800 करोड़ रुपये का नया ऋण लेने जा रही है. साल 2026 में यह चौथी बार होगा जब सरकार बाजार से कर्ज उठाएगी. इसके साथ ही चालू वित्त वर्ष में अब तक लिए गए कुल ऋण की राशि बढ़कर 9200 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है.
मध्यप्रदेश सरकार ले रही है श्रण
वित्त विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यह कर्ज “7.83 प्रतिशत मध्यप्रदेश राज्य विकास ऋण 2048” योजना के तहत लिया जाएगा. सरकार ने इसे दो हिस्सों में बांटा है. इसमें 1600 करोड़ रुपये और 1200 करोड़ रुपये के अलग-अलग राज्य विकास ऋण शामिल किए गए हैं. दोनों पर ब्याज दर भी अलग तय की गई है. 1600 करोड़ रुपये वाले ऋण पर सरकार को 7.64 प्रतिशत ब्याज देना होगा, जबकि 1200 करोड़ रुपये के ऋण पर 7.83 प्रतिशत ब्याज दर लागू रहेगी.
सरकार दोनों ऋणों का भुगतान किस्तों में करेगी
सरकार इन दोनों ऋणों का भुगतान किस्तों में करेगी. जानकारी के मुताबिक इसकी अदायगी हर छह महीने में की जाएगी. अप्रैल और अक्टूबर में निर्धारित किस्तों के जरिए यह भुगतान पूरा होगा. इससे पहले अप्रैल महीने में राज्य सरकार ने दो बार में कुल चार किस्तों के जरिए 4600 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था. इसके बाद मई में 1800 करोड़ रुपये का ऋण और लिया गया. अब सरकार फिर से 2800 करोड़ रुपये का नया कर्ज जुटाने जा रही है. लगातार बढ़ते कर्ज को लेकर राजनीतिक और आर्थिक हलकों में चर्चा भी तेज हो गई है.
विकास कार्यों पर खर्च
सरकार का कहना है कि यह राशि राज्य के विकास कार्यों पर खर्च की जाएगी. खासतौर पर सिंचाई परियोजनाओं, कृषि क्षेत्र, ऊर्जा व्यवस्था और आधारभूत संरचना से जुड़े कामों में इस धन का उपयोग किया जाएगा. इसके अलावा कई उत्पादक विकास योजनाओं को भी इस फंड से गति देने की तैयारी है. सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से भविष्य में राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
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