भोपाल। मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) ने विशेष शिक्षक भर्ती परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों के लिए बड़ा निर्देश जारी किया है। जिन उम्मीदवारों ने आवेदन के दौरान आरसीआई (RCI) से मान्यता प्राप्त डिप्लोमा होने का दावा किया था, उन्हें अब इसका प्रमाण पत्र अपलोड करना होगा। ऐसा नहीं करने वाले अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया से बाहर किया जा सकता है।
3200 पदों के लिए हुई थी भर्ती परीक्षा
साल 2025 में ESB ने विशेष शिक्षक के 3200 पदों पर भर्ती परीक्षा आयोजित की थी। परीक्षा के बाद करीब 5000 अभ्यर्थी चयन सूची में शामिल हुए। जांच में सामने आया कि मेरिट सूची में ऐसे कई अभ्यर्थी भी शामिल हो गए, जिनके पास आरसीआई से मान्यता प्राप्त डिप्लोमा नहीं था।
बोनस अंक पाने के लिए भरा था 'हां' विकल्प
आवेदन प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों से केवल यह पूछा गया था कि उनके पास आरसीआई से मान्यता प्राप्त दो वर्षीय डिप्लोमा है या नहीं। इसके लिए ‘हां’ और ‘नहीं’ का विकल्प दिया गया था। जिन उम्मीदवारों ने ‘हां’ चुना, उन्हें 5 बोनस अंक दिए गए।
इसी व्यवस्था का फायदा उठाते हुए कुछ अभ्यर्थियों ने बिना प्रमाण पत्र के ही ‘हां’ विकल्प भर दिया और बोनस अंक लेकर मेरिट सूची में जगह बना ली।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद शुरू हुई कार्रवाई
दिव्यांगजन आयुक्त कार्यालय को इस संबंध में कई शिकायतें मिली थीं। इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग और कर्मचारी चयन मंडल को जानकारी भेजी गई। मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहुंचा, जहां 14 मई को अदालत ने ESB को विसंगति दूर करने और अभ्यर्थियों से दस्तावेज लेने के लिए पोर्टल खोलने के निर्देश दिए।
8 जुलाई तक खुला रहेगा पोर्टल
ESB ने अभ्यर्थियों को वैध RCI पंजीयन और प्रमाण पत्र अपलोड करने का मौका दिया है। इसके लिए पोर्टल 24 जून से 8 जुलाई तक खुला रहेगा। निर्धारित समय सीमा के भीतर दस्तावेज जमा करना अनिवार्य होगा।
बिना प्रमाण पत्र वाले अभ्यर्थी होंगे बाहर
ESB अधिकारियों के अनुसार, जिन अभ्यर्थियों ने आवेदन में RCI डिप्लोमा होने का दावा किया था लेकिन अब प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं कर पाएंगे, उन्हें वर्तमान मेरिट सूची से बाहर कर दिया जाएगा। इसके बाद केवल पात्र अभ्यर्थियों को ही विशेष शिक्षक भर्ती में मौका मिलेगा।
आवेदन प्रक्रिया में हुई थी बड़ी चूक
विशेष शिक्षक भर्ती में आरसीआई मान्यता प्राप्त डिप्लोमा रखने वाले उम्मीदवारों को 5 बोनस अंक देने का प्रावधान था। हालांकि आवेदन के दौरान दस्तावेजों का सत्यापन नहीं होने के कारण यह गड़बड़ी सामने आई। अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद इस पूरी प्रक्रिया में सुधार किया जा रहा है।
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