मध्य प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए जेब पर असर डालने वाली खबर सामने आई है. प्रदेश में एक बार फिर बिजली बिल का बोझ बढ़ गया है. सितंबर 2026 के लिए बिजली बिल में लगने वाले FPPAS यानी Fuel and Power Purchase Adjustment Surcharge की दर में इजाफा किया गया है. नई दर लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को अपने बिजली बिल में पहले की तुलना में ज्यादा राशि चुकानी पड़ सकती है.
अगस्त के मुकाबले सितंबर में बढ़ा FPPAS
जानकारी के मुताबिक, अगस्त 2026 में बिजली बिल पर FPPAS की दर 4.59 प्रतिशत निर्धारित थी. अब सितंबर महीने के लिए इसे बढ़ाकर 5.063 प्रतिशत कर दिया गया है. FPPAS की यह संशोधित दर 24 सितंबर 2026 से प्रभावी होगी. इसका सीधा असर बिजली उपभोक्ताओं के एनर्जी चार्ज पर पड़ेगा.
यानी जिन उपभोक्ताओं के बिल में एनर्जी चार्ज ज्यादा है, उनके लिए इस बढ़ी हुई दर का असर भी उसी हिसाब से दिखाई दे सकता है. हालांकि, बिल की कुल राशि हर उपभोक्ता की खपत और लागू शुल्क के आधार पर अलग-अलग होगी.
तीनों बिजली कंपनियों के उपभोक्ताओं पर असर
FPPAS की नई दर सिर्फ किसी एक इलाके या बिजली कंपनी तक सीमित नहीं है. मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बिजली सप्लाई करने वाली तीनों वितरण कंपनियों के उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव पड़ेगा. इनमें पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी और पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी शामिल हैं.
इस संबंध में मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड, जबलपुर की ओर से आदेश जारी किया गया है. आदेश पर कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक शैलेंद्र सक्सेना के हस्ताक्षर हैं. आदेश में सितंबर 2026 के लिए FPPAS की संशोधित दर का उल्लेख किया गया है.
बिजली बिल में क्यों जुड़ता है FPPAS?
FPPAS का इस्तेमाल बिजली उत्पादन और बिजली खरीद से जुड़ी लागत में होने वाले बदलाव का समायोजन करने के लिए किया जाता है. ईंधन और बिजली खरीद की लागत में बदलाव होने पर इस तरह के समायोजन का असर उपभोक्ताओं के बिल पर पड़ सकता है.
ऐसे में सितंबर के लिए FPPAS को 4.59 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.063 प्रतिशत किए जाने के बाद प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को बढ़े हुए एनर्जी चार्ज का सामना करना पड़ सकता है. खास तौर पर ज्यादा बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं के बिल में इसका असर अधिक दिखाई दे सकता है.







