मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिव्यांगजनों को लेकर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि दिव्यांगता को किसी भी तरह से कमजोरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. असली ताकत शरीर में नहीं, बल्कि व्यक्ति की इच्छाशक्ति में होती है. उन्होंने कहा कि ईश्वर ने दिव्यांगजनों को विशेष गुणों से नवाजा है, जो उन्हें कई मामलों में और भी सक्षम बनाते हैं. एक विकसित समाज की पहचान यही है कि वहां दिव्यांगजन केवल सहानुभूति के पात्र न रहें, बल्कि उन्हें बराबरी का सम्मान, अधिकार और अवसर मिलें. सरकार का उद्देश्य भी यही है कि उनके अधिकारों की रक्षा हो और उन्हें हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिले.
दिव्यांगजन के लिए मोहन सरकार की बल्ले-बल्ले
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि दिव्यांगजन समाज और देश की प्रगति का अहम हिस्सा हैं. उन्हें अलग नजर से देखने के बजाय उनकी क्षमताओं को पहचानना जरूरी है. सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ उनके हितों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बना रही है और उन्हें लागू कर रही है.
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र की व्यवस्था लागू है. शासकीय नौकरियों में 4 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है और हर विभाग में समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए अलग सेल बनाए गए हैं. सार्वजनिक और सरकारी भवनों को दिव्यांगजन के अनुकूल बनाने के लिए रैंप और वॉशरूम जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा पेंशन, जरूरत के अनुसार सहायक उपकरणों का वितरण और सामाजिक एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए विवाह प्रोत्साहन जैसी योजनाएं भी संचालित हैं.
इतना मिलेगा मानदेय
मुख्यमंत्री ने बताया कि सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की संस्थाओं में कार्यरत अतिथि शिक्षकों को अब वर्ग-1 के बराबर हर महीने 18 हजार रुपये मानदेय देने का निर्णय लिया गया है. यह कदम उनके सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. दिव्यांगजनों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए राज्य में टोल-फ्री हेल्पलाइन शुरू की गई है. साथ ही दिव्य मेलों के आयोजन के माध्यम से उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच भी दिया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि असली फर्क नजर में नहीं, नजरिए में होता है. जो व्यक्ति अपनी कमी को भी ताकत में बदल लेता है, वही इतिहास रचता है. समाज में ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां दिव्यांगजन कवि, लेखक, वैज्ञानिक, उद्यमी और कलाकार बनकर अपनी पहचान बना चुके हैं.
दिव्यांगजनों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने के लिए समाज तैयार
उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश सरकार दिव्यांगजनों के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है. राज्य में विभिन्न संस्थानों के माध्यम से सांकेतिक भाषा प्रशिक्षण, मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में लगातार काम किया जा रहा है. उनका मानना है कि दिव्यांगजनों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने के लिए समाज की भागीदारी जरूरी है और इसी उद्देश्य से एक व्यापक योजना पर काम किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भोपाल शहर दिव्यांगता से जुड़े अध्ययन, शोध और पुनर्वास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है. यहां नई नीतियां बन रही हैं और उन्हें प्रभावी तरीके से लागू भी किया जा रहा है. खासकर मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास के क्षेत्र में सीहोर में राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों के सहयोग से प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है.
उन्होंने कहा कि सरकार न केवल राज्य में, बल्कि देश स्तर पर भी दिव्यांगजन कल्याण की दिशा में नई पहल करने के लिए प्रयासरत है. समावेशी समाज के निर्माण के लिए जरूरी है कि दिव्यांगजनों के लिए मजबूत इको-सिस्टम तैयार किया जाए. सांकेतिक भाषा प्रशिक्षण, मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं और खेल प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में कई संस्थान सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं. इसके साथ ही दिव्यांगजनों की देखभाल करने वाले लोगों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि पूरा तंत्र संवेदनशील और मजबूत बन सके.
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