भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्य प्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर लगातार सामने आ रहे विवादों के बीच पार्टी अब अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करने की तैयारी में है। अब जिला स्तर पर होने वाली नियुक्तियों में किसी एक नेता की सिफारिश को अंतिम आधार नहीं बनाया जाएगा। संबंधित क्षेत्र के वरिष्ठ नेताओं और संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद ही नामों को अंतिम रूप देने की व्यवस्था लागू की जाएगी।
कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय की बात
दरअसल, प्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक पदों पर नियुक्तियों को लेकर कई बार अंदरूनी असहमति सामने आती रही है। कुछ जगहों पर नियुक्ति के बाद विरोध शुरू हुआ तो कई मामलों में विवाद बढ़ने पर पार्टी को अपने निर्णय पर पुनर्विचार तक करना पड़ा। कुछ नियुक्तियों को निरस्त करने और नाराज कार्यकर्ताओं को दूसरी जिम्मेदारी देने की स्थिति भी बनी। इससे संगठनात्मक गतिविधियों के साथ कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय प्रभावित हुआ।
विवादित नियुक्तियों से पार्टी ने लिया सबक
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की प्राथमिकता संगठन में अधिक से अधिक नेताओं की सहमति बनाने की रही है। संगठन सृजन अभियान के तहत केंद्रीय पर्यवेक्षकों की अनुशंसा के आधार पर हाल में कई जिलों में जिलाध्यक्ष नियुक्त किए गए थे। हालांकि, कुछ स्थानों पर इन नियुक्तियों को लेकर कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं में नाराजगी देखने को मिली। विरोध की स्थिति जिला स्तर से बढ़कर भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय तक पहुंची।
MP में 72 सीटों पर चुनाव लड़ेगी ये पार्टी… बीजेपी-कांग्रेस का समीकरण बिगाड़ने की पूरी तैयारी
सहमति के फॉर्मूले पर काम
वर्तमान अनुभवों के बाद कांग्रेस नेतृत्व अब आगामी नियुक्तियों को लेकर ज्यादा सतर्क नजर आ रहा है। जिला कार्यकारिणियों के गठन के दौरान वरिष्ठ नेताओं से चर्चा और स्थानीय स्तर पर सहमति बनाने की प्रक्रिया अपनाई गई, जिससे विवाद अपेक्षाकृत कम हुए। अब पार्टी इसी मॉडल को अन्य संगठनात्मक नियुक्तियों में भी लागू करने की तैयारी कर रही है।
19 विभाग और 34 प्रकोष्ठों में नियुक्तियां बाकी
मध्य प्रदेश कांग्रेस के सामने आने वाले समय में संगठन के विस्तार की बड़ी जिम्मेदारी है। पार्टी के 19 विभाग और 34 प्रकोष्ठों में प्रदेश से लेकर जिला स्तर तक पदाधिकारियों की नियुक्तियां की जानी हैं।इसके साथ ही अगले साल से चुनावी गतिविधियों के तेज होने की संभावना है। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व नहीं चाहता कि संगठन में पदों को लेकर कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच गुटबाजी या असंतोष की स्थिति बने। यही वजह है कि पार्टी अब नियुक्तियों में व्यापक सहमति और क्षेत्रीय संतुलन को प्राथमिकता देने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
पहले समन्वय समिति में चर्चा, फिर नाम भेजे जाएंगे
नई व्यवस्था के तहत जिला स्तर पर किसी पद के लिए नाम तय करने से पहले संबंधित समन्वय समिति में प्रस्ताव रखा जाएगा। जिला और संभाग स्तर पर गठित इन समितियों में विधायक, पूर्व विधायक, सांसद, पूर्व सांसद, पंचायत प्रतिनिधि, महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष सहित संगठन के वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है। अब जिलाध्यक्ष सीधे किसी नाम की अनुशंसा प्रदेश कांग्रेस को नहीं भेजेंगे। पहले प्रस्तावित नामों पर समिति के सदस्यों के बीच चर्चा होगी। विचार-विमर्श के बाद तैयार सूची को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय भेजा जाएगा, जहां अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
Special News: ‘शाह’ से ‘मोहन’ की मुलाकात… MP में सियासी हलचल तेज, क्या है मायने?
सक्रिय कार्यकर्ताओं को भी मिलेगा प्रतिनिधित्व
कांग्रेस की नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल नियुक्तियों से जुड़े विवादों को कम करना ही नहीं है, बल्कि संगठन में अधिक से अधिक सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देना भी है। यदि प्रदेश नेतृत्व को लगता है कि किसी योग्य और सक्रिय कार्यकर्ता को प्रस्तावित सूची में स्थान नहीं मिला है, तो स्थानीय संगठन से उस नाम पर दोबारा विचार करने के लिए कहा जा सकता है। पार्टी के इस कदम से उन कार्यकर्ताओं को भी संगठन में जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं लेकिन अब तक किसी पद पर नहीं आ सके हैं।
नई प्रदेश कार्यकारिणी में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर जोर
प्रदेश कांग्रेस संगठन के मुताबिक पार्टी संगठनात्मक ढांचे में विकेंद्रीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है। उनका कहना है कि नियुक्तियों और महत्वपूर्ण संगठनात्मक निर्णयों में ज्यादा से ज्यादा नेताओं और कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।वहीं प्रदेश कांग्रेस की मौजूदा कार्यकारिणी को भी जल्द भंग किए जाने की तैयारी की जा रही है। इसके बाद नई प्रदेश टीम का गठन होगा। नई कार्यकारिणी में क्षेत्रीय, राजनीतिक और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखने के साथ युवाओं को प्रतिनिधित्व देने पर भी जोर रहने की संभावना है। इसके साथ ही अनुभवी नेताओं की भूमिका को भी संगठन में बनाए रखने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।
एक तरफा निर्णय की बजाय सामूहिक सहमति पर जोर
कुल मिलाकर मध्य प्रदेश कांग्रेस संगठनात्मक नियुक्तियों के पुराने तरीके में बदलाव करते हुए अब ‘एकतरफा निर्णय’ की जगह ‘सामूहिक सहमति’ के मॉडल को अपनाने की तैयारी में है। आने वाले महीनों में 19 विभागों, 34 प्रकोष्ठों और अन्य संगठनात्मक इकाइयों में होने वाली नियुक्तियां इस नई व्यवस्था की बड़ी परीक्षा होंगी।
MP News: मध्यप्रदेश के इस जिले में आई नेपाल जैसी बाढ़… सांसद ने की मुख्यमंत्री से चर्चा







