मध्य प्रदेश के किसानों के लिए खरीफ सीजन के दौरान राहत भरी खबरों की चर्चा तेज हो गई है. हाल ही में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की अगली किस्त जारी की है. इसके बाद अब प्रदेश के लाखों किसानों की उम्मीदें मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की अगली किस्त पर टिकी हैं. गांवों और किसान संगठनों के बीच यह चर्चा चल रही है कि राज्य सरकार योजना की 14वीं और 15वीं किस्त एक साथ जारी कर सकती है. यदि ऐसा होता है तो पात्र किसानों के बैंक खातों में एकमुश्त 4000 रुपये पहुंच सकते हैं.
हालांकि अभी तक राज्य सरकार या कृषि विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. इसलिए फिलहाल इसे केवल संभावना के रूप में ही देखा जा रहा है. बावजूद इसके किसानों में इसे लेकर उत्सुकता बनी हुई है. मानसून के सक्रिय होने के साथ ही प्रदेशभर में किसान खरीफ फसलों की बुवाई की तैयारी में जुट गए हैं. इस दौरान बीज, खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि सामग्री पर खर्च बढ़ जाता है. ऐसे समय में यदि सरकार की ओर से आर्थिक सहायता मिलती है तो किसानों को खेती का खर्च उठाने में काफी मदद मिल सकती है.
इन कारणों से रुक सकती है आपकी किस्त
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई बार सरकार राशि जारी कर देती है, लेकिन तकनीकी या दस्तावेजी गड़बड़ी के कारण किसानों के खाते में पैसा नहीं पहुंच पाता. इसलिए किसानों को समय रहते अपने सभी रिकॉर्ड की जांच कर लेनी चाहिए. यदि आपके बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT सुविधा सक्रिय नहीं है या आधार बैंक खाते से लिंक नहीं है, तो किस्त मिलने में परेशानी आ सकती है.
आधार और बैंक विवरण सही रखें
बैंक खाते और आधार कार्ड में दर्ज नाम, जन्मतिथि या अन्य जानकारी में किसी प्रकार की त्रुटि होने पर भी भुगतान अटक सकता है. इसलिए दोनों रिकॉर्ड का मिलान जरूर कर लें. मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलता है जिनकी भूमि का सत्यापन पूरा हो चुका है. यदि लैंड सीडिंग या राजस्व रिकॉर्ड में कोई कमी है तो किस्त रुक सकती है. किसान योजना का स्टेटस ऑनलाइन पोर्टल पर जांच सकते हैं. यदि किसी प्रकार की त्रुटि दिखाई दे तो उसका सुधार पटवारी, कृषि विस्तार अधिकारी या संबंधित विभाग के माध्यम से जल्द करा लेना चाहिए. विशेषज्ञ भी किसानों को सलाह दे रहे हैं कि सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट खबरों पर भरोसा करने के बजाय केवल सरकार की आधिकारिक सूचना और पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी को ही सही मानें. इससे भविष्य में मिलने वाली किस्तों में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी.







