मध्य प्रदेश की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. मानसून सत्र के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंत्रिमंडल में विस्तार और फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं. राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि यह सिर्फ कैबिनेट में बदलाव नहीं होगा, बल्कि भाजपा की 2028 विधानसभा चुनाव की रणनीति का अहम हिस्सा साबित हो सकता है. सत्ता और संगठन दोनों स्तरों पर इसे लेकर लगातार मंथन चल रहा है.
प्रदर्शन और संगठन की रिपोर्ट बनेगी आधार
सूत्रों की मानें तो सरकार कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव कर सकती है. वहीं कई नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है. संभावित फेरबदल में मंत्रियों के प्रदर्शन, संगठन की फीडबैक रिपोर्ट, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और सामाजिक समीकरणों को अहम आधार माना जा रहा है. पार्टी नेतृत्व उन क्षेत्रों और वर्गों को भी साधने की कोशिश में है, जहां राजनीतिक रूप से और मजबूत होने की जरूरत महसूस की जा रही है.
महिला नेतृत्व और बुंदेलखंड पर विशेष नजर
भाजपा आगामी चुनावों को देखते हुए महिला नेतृत्व को ज्यादा अवसर देने के मूड में दिखाई दे रही है. इसी वजह से रीति पाठक, मालिनी गौड़ और अर्चना चिटनीस जैसे नाम चर्चाओं में बने हुए हैं. इसके साथ ही बुंदेलखंड क्षेत्र को भी राजनीतिक तौर पर साधने की तैयारी चल रही है. सागर, दमोह, पन्ना और टीकमगढ़ जैसे जिलों को बेहतर प्रतिनिधित्व देने पर विचार किया जा सकता है.
OBC वोट बैंक को मजबूत करने की कवायद
प्रदेश की राजनीति में ओबीसी वर्ग का प्रभाव काफी अहम माना जाता है. ऐसे में भाजपा इस वर्ग में अपनी पकड़ और मजबूत करने के लिए कैबिनेट फेरबदल का इस्तेमाल कर सकती है. पार्टी की रणनीति सामाजिक संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ आगामी चुनावों के लिए मजबूत राजनीतिक संदेश देने की भी है.
कुछ मंत्रियों के प्रदर्शन पर उठ रहे सवाल
संगठन स्तर पर कुछ मंत्रियों के कामकाज को लेकर चर्चा लगातार जारी है. वरिष्ठ मंत्री विजय शाह का नाम विवादों की वजह से सुर्खियों में रहा है. वहीं दिलीप अहिरवार, प्रतिमा बागरी, राधा सिंह और एदल सिंह कंषाना के प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. बताया जा रहा है कि कुछ मंत्रियों के खिलाफ लगातार मिल रही शिकायतों ने पार्टी नेतृत्व का ध्यान खींचा है.
बड़े नेताओं के विभागों में भी हो सकता है बदलाव
संभावित फेरबदल सिर्फ नए चेहरों तक सीमित नहीं रह सकता. सरकार के कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है. प्रहलाद पटेल को अतिरिक्त जिम्मेदारियां मिलने की चर्चा है, जबकि कैलाश विजयवर्गीय और तुलसीराम सिलावट के विभागों में पुनर्गठन को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं.
संपतिया उइके को लेकर भी चर्चा तेज
राजनीतिक हलकों में मंत्री संपतिया उइके का नाम भी चर्चा में है. कहा जा रहा है कि उनके विभाग और कामकाज को लेकर कुछ शिकायतें संगठन तक पहुंची हैं. हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन संभावित फेरबदल की चर्चाओं में उनका नाम लगातार शामिल है.
2028 चुनाव की तैयारी का अहम कदम
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कैबिनेट फेरबदल सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं होगा. इसके जरिए भाजपा 2028 विधानसभा चुनाव की मजबूत नींव रखने की कोशिश कर सकती है. पार्टी एक ओर नए और युवा चेहरों को मौका देना चाहती है, तो दूसरी ओर क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन बनाकर अपने चुनावी समीकरण मजबूत करने की तैयारी में है. अब







