MP Bus Mafia News: देश के कई राज्यों में बस माफियाओं आतंक चल रहा है। अक्सर बस दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन बस मालिकों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। ये बस मालिक बड़ी चालाकी से मोटर व्हीकल एक्ट की सुविधाओं का लाभ उठाकर बच निकलते हैं। और इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ता है।
यात्रियों का कहना है कि बस संचालक बड़ी दबंगई से यात्रियों के साथ पेश आते हैं। हाल ही में यमुना एक्सप्रेसवे हादसे में 9 यात्रियों की जिंदा जलने से मौत हो गई थी। ऐसे कई अन्य मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें खटारा बसों के कारण गंभीर हादसे हुए हैं, लेकिन बस संचालकों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती।
इन घटनाओं पर डालें नजर, बस संचालक पर क्या कार्रवाई हुई...?
बस दुर्घटना के कई मामले सामने आते हैं। लेकिन इन घटनाओं पर एक नजर डाले तो जुलाई 2026 में दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे पर एक्सीडेंट हुआ था जिसमें 8 यात्रियों की मौत हो गई थी। अगस्त के महीने में लखनऊ से इंदौर जा रही एक बस का एक्सीडेंट हुआ था जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी। इस बस का रजिस्ट्रेशन नागालैंड का था।
अक्टूबर 2025 में छतरपुर आरटीओ ने 12 संचालकों को नोटिस दिया था। इसके बाद संचालक कौन है बस का संचालन मध्य प्रदेश राज्य के बाहर करना शुरू कर दिया। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इन बसों के लिए बुकिंग की जा रही है।
इन हादसों का जिम्मेदार कौन...
मई 2026 के महीने में पता चला था कि, दिल्ली–कानपुर–इंदौर रूट पर यात्री बेसन का उपयोग, कमर्शियल ट्रांसपोर्टेशन के लिए बिल्कुल वैसे किया जा रहा है जैसे ट्रैक किया जाता है। मतलब यात्री बस के परमिट पर माल ढुलाई हो रही थी।
मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश के बॉर्डर पर जुलाई 2026 तक छतरपुर पुलिस ने छह महीने में 1,081 ओवरलोड बसों के चालान काटे। सितंबर 2026 में सागर में एक ही नंबर MP10P0603 की दो अलग बसें एक ही दिन जब्त हुईं, डुप्लिकेट नंबर का सीधा संकेत। इंदौर का एक बड़ा ऑपरेटर है। वह भी बिल्कुल ऐसे ही गड़बड़ी वाले काम करके बस ऑपरेट करता है। किसी राज्य से फिटनेस, किसी राज्य से पॉल्यूशन सर्टिफिकेट, और किसी अन्य राज्य में यात्रियों का परिवहन करता है।
खबर डिजिटल की अपील...आवाज उठाओ, किसी का दीपक बुझने से बचाओ
कुल मिलाकर बात यह है कि मध्य प्रदेश के कुछ शातिर बस ऑपरेटरों ने विभिन्न राज्यों के परिवहन कानून की कमी का अध्ययन कर लिया है और इसका फायदा उठाने लगे हैं। इसके कारण यात्रियों की जान जोखिम में होती है। फेस्टिवल सीजन आ गया है पता नहीं कितने लोगों के साथ क्या होगा।
यदि आप आज अभी, इसी वक्त सोशल मीडिया पर आवाज उठाएंगे, तो शायद ऐसे शातिर बस ऑपरेटरों के खिलाफ सरकार की ओर से कोई कठोर कदम उठाए जाएं और फेस्टिवल सीजन में, दीपावली के मौके पर किसी के घर का दिया बुझने से बच जाएगा।







