मध्य प्रदेश भाजपा में प्रदेश कार्यसमिति के गठन को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं. हेमंत खंडेलवाल को प्रदेश अध्यक्ष बने करीब 11 महीने हो चुके हैं, लेकिन अब तक नई कार्यसमिति का ऐलान नहीं हो पाया है. पार्टी के भीतर इसे लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं. माना जा रहा है कि संगठन की तय गाइडलाइन और नेताओं की राजनीतिक निष्ठा के बीच तालमेल नहीं बैठ पाने की वजह से मामला अटका हुआ है.
अप्रैल में घोषणा के संकेत, लेकिन अब तक इंतजार
हेमंत खंडेलवाल ने फरवरी और मार्च के दौरान कई बार संकेत दिए थे कि अप्रैल के पहले सप्ताह तक प्रदेश कार्यसमिति घोषित कर दी जाएगी. बाद में 28 अप्रैल को भोपाल में आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान की बैठक में भी उन्होंने मंच से कहा था कि यदि अनुमति मिलती है तो मई में कार्यसमिति की घोषणा कर दी जाएगी और ओरछा में इसकी पहली बैठक आयोजित होगी. उस दौरान उन्होंने मीडिया से भी जल्द सूची जारी होने की बात कही थी, लेकिन मई बीतने के बाद भी कार्यसमिति का गठन नहीं हो सका. इससे पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच चर्चाओं का दौर तेज हो गया है.
सिंधिया समर्थकों की सूची बनी बड़ी वजह
सूत्रों के अनुसार केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने समर्थकों की लंबी सूची पार्टी नेतृत्व को सौंपी है. इनमें कई ऐसे नेता शामिल बताए जा रहे हैं जो पिछला चुनाव हार चुके हैं या फिर टिकट नहीं पा सके थे. पार्टी नेतृत्व का मानना है कि 2020 से 2023 के बीच विशेष परिस्थितियों में कांग्रेस और अन्य दलों से भाजपा में शामिल हुए नेताओं और उनके समर्थकों को समायोजित करने के लिए छूट दी गई थी. लेकिन अब संगठन इस तरह के विशेष प्रावधानों से दूरी बनाना चाहता है.
भाजपा अब गाइडलाइन पर सख्त
भाजपा की संगठनात्मक गाइडलाइन के मुताबिक प्रदेश कार्यसमिति में सीमित संख्या ही तय की गई है. इसमें मुख्य कार्यसमिति सदस्यों की अधिकतम संख्या 106 रखी गई है. इसके अलावा करीब 25 स्थायी आमंत्रित सदस्य और लगभग 26 विशेष आमंत्रित सदस्य शामिल किए जा सकते हैं. ऐसे में बड़ी संख्या में नेताओं और समर्थकों को जगह देना संगठन के लिए चुनौती बन गया है. यही वजह है कि सूची को अंतिम रूप देने में लगातार देरी हो रही है.
वीडी शर्मा के समय बनी थी जंबो कार्यसमिति
मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने समर्थक विधायकों और नेताओं के साथ भाजपा में शामिल हुए थे. इसके बाद जून 2021 में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के कार्यकाल में 403 सदस्यों वाली बड़ी कार्यसमिति बनाई गई थी. उस समय बड़ी संख्या में नेताओं को एडजस्ट करने के लिए विशेष आमंत्रित सदस्यों की संख्या काफी बढ़ा दी गई थी. बताया जाता है कि उस समिति में 218 विशेष आमंत्रित सदस्य शामिल थे. राजनीतिक गलियारों में इसे संगठनात्मक ढांचे से ज्यादा राजनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश माना गया था.







