MP BJP: मध्य प्रदेश भाजपा की नई नवेली प्रदेश कार्यसमिति के गठन के बाद अब कप्तानों के बीच कार्य विभाजन और मैदानी कमान सौंपने की कवायद तेज हो गई है। साल 2027 में होने वाले नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों को भेदने के लिए भाजपा का प्रदेश नेतृत्व अब अपने सदस्यों को जल्द से जल्द सक्रिय करने की रणनीति बना रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की इस नई टीम की पहली बैठक 15 जुलाई 2026 के बाद ओरछा में आयोजित होने जा रही है। भगवान रामराजा सरकार के दरबार में होने वाली इस पहली बैठक को सियासी लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्षेत्रवार मिलेगी कमान
कार्यसमिति में शामिल 106 सदस्यों और वरिष्ठ नेताओं को सीधे तौर पर विधानसभा और क्षेत्रवार जिम्मेदारियां आवंटित की जाएंगी। इस विभाजन के माध्यम से भाजपा का मुख्य फोकस सूबे की हर एक विधानसभा सीट पर पकड़ को मजबूत करना है, ताकि आगामी चुनावों में विपक्ष का सूपड़ा साफ किया जा सके।
नियुक्तियों का कड़वा सच
नई प्रदेश कार्यसमिति से कई पुराने और कद्दावर चेहरों की छुट्टी कर दी गई है। दरअसल, कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले नए नेताओं को एडजस्ट करने के चक्कर में भाजपा के मूल विचार वाले पुराने जमीनी चेहरों को साइडलाइन होना पड़ा है। इसको लेकर संगठन के गलियारों में अंदर ही अंदर असंतोष का लावा सुलग रहा है।
डैमेज कंट्रोल में जुटे कप्तान
सूत्रों की मानें तो कार्यसमिति की सूची जारी होने के बाद से ही भाजपा का शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह से डैमेज कंट्रोल मोड पर आ चुका है। वर्तमान में भाजपा को एक साथ दो बड़े मोर्चों पर लड़ाई लड़नी पड़ रही है। पहली वो जो नए पदाधिकारी और सिंधिया गुट सहित अन्य नेता टीम में शामिल किए गए हैं, उन्हें सही तरीके से काम सौंपकर उनके प्रभाव का पार्टी के लिए लाभ उठाना। तो दूसरा वो, जो भाजपाई नेता उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, उन्हें समय रहते गुप्त मुलाकातों के जरिए मनाना, उनका गुस्सा शांत करना और उन्हें वापस काम पर सक्रिय करना।







