भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ बीजेपी ने पिछले दो-तीन दिन के भीतर मध्यप्रदेश की सियासत की फिजां बदल दी है। सह संगठन महामंत्री को मध्यप्रदेश का प्रभार, चंद्रशेखर को प्रदेश संगठन महामंत्री, विप्लव कुमार देव को प्रदेश प्रभारी बनाकर साफ कर दिया कि अब कुछ नया होने वाला है। भगवा ब्रिगेड में इसका असर भी दिखाई देने लगा है। जब कुछ नेताओं ने नाराजगी को खुलकर जाहिर किया तो कुछ नेताओं ने अपनी बयानबाजी से किनारा कर लिया।
भोपाल में तीन नेताओं ने जताया विरोध
राजधानी में आयोजित मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा एवं पीएम ई-बस सेवा कार्यक्रम के कार्ड में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, मंत्री विश्वास सारंग और राज्य मंत्री कृष्णा गौर का नाम नहीं था। जिसकी जिम्मेदारी भोपाल नगर निगम की थी, जिससे नाराज होकर तीनों नेताओं ने कार्यक्रम में आने के न्यौते को ठुकरा दिया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, CM मोहन यादव और मंत्री चैतन्य कश्यप के नाम चस्पा थे। इस घटनाक्रम में नेताओं की नाराजगी को बदले परिवेश से जोड़कर देखा जा रहा है।
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मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बोलने से किया इंकार
इंदौर की दतुनी पहाड़ी पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी कार्यक्रम में शामिल हुए और पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जब मीडिया ने मंत्री से बातचीत कर प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की, तो उन्होंने सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया। नाराजगी जाहिर करते हुए विजयवर्गीय ने कहा, 'अब इंदौर में बाइट देना बंद, मैं नहीं बोलूंगा।' उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों के बीच यह चर्चा का विषय बन गया, क्योंकि इंदौर उनका गृहक्षेत्र है।
कद्दावरों के बीच जंग होगी खत्म
काफी दिनों से देखा जा रहा था कि एमपी बीजेपी के कुछ नेता आलाकमान के फैसलों की खुलकर मुखालफत कर रहे है। जिसका असर आम कार्यकर्ताओं पर पड़ रहा है। पोस्टर-बैनरों में इसकी छवि साफ देखी जा रही है, परंतु अब माना जा रहा है कि ऐसा कुछ भी नहीं होने दिया जाएगा, क्योंकि शिवप्रकाश-चंद्रशेखर-विप्लव नाम के त्रिदेव के सामने इनकी चलना काफी मुश्किल नजर आ रहा है, जिसकी बानगी आने वाले वक्त में चुनौतियों से निपटने के लिए साफ दिखाई देगी।
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