Modi Cabinet Expansion: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के संभावित मंत्रिपरिषद विस्तार को लेकर सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, बीजेपी आलाकमान आगामी राज्यों के विधानसभा चुनावों और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने के लिए एक बड़ा प्लान तैयार कर रहा है। इस विस्तार में मध्य प्रदेश की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है, जहां से कई कद्दावर सांसदों को दिल्ली दरबार में सीधे एंट्री मिल सकती है।
जाटव वोट बैंक साधने की कवायद
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार संध्या राय दलित और जाटव समाज का एक प्रभावशाली चेहरा हैं। दरअसल, भिंड की बॉर्डर सीधे उत्तर प्रदेश से जुड़ता है, इसलिए बीजेपी उनके जरिए यूपी चुनाव से पहले दलित मतदाताओं को एक बड़ा और मजबूत संदेश देने की तैयारी में है। उन्हें मोदी कैबिनेट में राज्यमंत्री बनाया जा सकता है।
तरुण चुग को प्रमोशन!
बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और मध्य प्रदेश कोटे से हाल ही में राज्यसभा पहुंचे तरुण चुग का नाम भी कैबिनेट मंत्रियों की रेस में सबसे आगे चल रहा है। संगठन में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें सीधे कैबिनेट मंत्री की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। माना जा रहा है कि आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव की रणनीति और वहां पार्टी को मजबूत करने के लिए तरुण चुग को सरकार में शामिल कर एक बड़ा चेहरा बनाया जाएगा।
वीडी शर्मा और गणेश सिंह
इसके अलावा खजुराहो से सांसद और मध्य प्रदेश बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का नाम भी लगातार चर्चाओं में बना हुआ है। सूत्रों की मानें तो सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर उनकी नई भूमिका को लेकर केंद्रीय नेतृत्व में मंथन चल रहा है। इसके साथ ही, विंध्य क्षेत्र के सतना से लगातार पांचवीं बार सांसद चुने गए कद्दावर नेता गणेश सिंह का नाम भी रेस में है। कुर्मी और पटेल समाज में मजबूत पकड़ रखने वाले गणेश सिंह को मंत्रिमंडल में अहम स्थान मिल सकता है।
आदिवासी चेहरों पर नजर
यह फेरबदल केवल नए मंत्रियों को शामिल करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सूत्रों के अनुसार लंबे समय से केंद्र में जमे कुछ मंत्रियों को हटाकर संगठन में भेजा जा सकता है। यदि मध्य प्रदेश के आदिवासी कोटे में बदलाव होता है, तो दो नए नाम सबसे आगे हैं। जिनमें शहडोल से सांसद हिमाद्री सिंह और खरगोन से सांसद गजेंद्र सिंह पटेल नाम चर्चा में बना हुआ है। सूत्रों का कहना है कि यह विस्तार केवल फेरबदल नहीं, बल्कि साल 2027 के उत्तर प्रदेश, पंजाब और अन्य राज्यों के चुनावों को ध्यान में रखकर किया जा सकता है।







