महाराज गोविंद देव ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली. भोपाल स्थित भाजपा आईटी सेल कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्हें भगवा गमछा पहनाकर पार्टी में शामिल कराया गया. इस अवसर पर कई भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे. भाजपा ने इसे संगठन के विस्तार और उपचुनाव से पहले मिली बड़ी राजनीतिक मजबूती के रूप में पेश किया.
कांग्रेस उम्मीदवार से जुड़ा है राजपरिवार
इस उपचुनाव में कांग्रेस ने दतिया राजपरिवार से जुड़े घनश्याम सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है. ऐसे में उसी राजपरिवार के प्रमुख सदस्य गोविंद देव का भाजपा में शामिल होना कांग्रेस के लिए चुनौती माना जा रहा है. माना जा रहा है कि इस फैसले का असर राजपरिवार से जुड़े समर्थकों और स्थानीय मतदाताओं पर भी पड़ सकता है.
बदल सकते हैं चुनावी समीकरण
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले हुई यह राजनीतिक एंट्री भाजपा को मनोवैज्ञानिक बढ़त दिला सकती है. दतिया में पहले से ही मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है और अब गोविंद देव के भाजपा में आने से चुनावी रणनीतियों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है. भाजपा इसे अपने पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास मान रही है, जबकि कांग्रेस के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है.
पहले भी लगाए थे आरोप
बताया जा रहा है कि महाराज गोविंद देव पहले भी कांग्रेस प्रत्याशी को लेकर सार्वजनिक तौर पर सवाल उठा चुके हैं. उनके हालिया फैसले के बाद राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उनके भाजपा में शामिल होने का चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ता है.
कई अन्य नेताओं ने भी थामा भाजपा का दामन
महाराज गोविंद देव के साथ शिवसेना के जिलाध्यक्ष रवि दीक्षित, विष्णु दीक्षित, शिशुपाल सहित कई अन्य कार्यकर्ताओं ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण की. भाजपा का दावा है कि लगातार विभिन्न दलों के नेता और कार्यकर्ता पार्टी से जुड़ रहे हैं, जिससे दतिया उपचुनाव में संगठन और मजबूत हुआ है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि यह राजनीतिक बदलाव मतदान के दिन कितना प्रभाव छोड़ता है.







