राज्यसभा को संसद का उच्च सदन माना जाता है और इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह कभी भंग नहीं होती. राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है, जबकि हर दो साल में इसके एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं. लोकसभा के विपरीत राज्यसभा के सांसदों का चुनाव सीधे जनता नहीं करती, बल्कि संबंधित राज्यों की विधानसभा के निर्वाचित विधायक उन्हें चुनते हैं.
कितने हैं राज्यसभा सीट
मध्य प्रदेश से राज्यसभा में कुल 11 सदस्य भेजे जाते हैं. वर्तमान समय में इनमें से 9 सांसद भारतीय जनता पार्टी से हैं, जबकि कांग्रेस के पास केवल 2 सीटें हैं. प्रदेश में बीजेपी की मजबूत स्थिति का असर राज्यसभा में भी साफ दिखाई देता है.
बीजेपी के कितने सांसदों को मिली है एंट्री
बीजेपी के राज्यसभा सांसदों में रजनीश अग्रवाल, महेश केवट, तरुण चुग, उमेश नाथ महाराज, बंसीलाल गुर्जर, एल मुरुगन, माया नारोलिया, कविता पाटीदार और सुमित्रा बालमिक शामिल हैं. हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के तीन उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे. कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद चुनाव कराने की आवश्यकता नहीं पड़ी और रजनीश अग्रवाल, महेश केवट तथा तरुण चुग सीधे राज्यसभा पहुंच गए.
कांग्रेस से इनको मिली है जगह
वहीं कांग्रेस की ओर से मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व अशोक सिंह और विवेक तन्खा कर रहे हैं. अशोक सिंह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं. वे ग्वालियर लोकसभा क्षेत्र से कई बार चुनाव लड़ चुके हैं, हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिली. इसके बावजूद उन्होंने संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. वर्ष 2021 में वे मध्य प्रदेश कांग्रेस में कोषाध्यक्ष, महासचिव और जिला अध्यक्ष जैसे पदों पर रहे. बाद में पार्टी ने उन्हें 2024 में राज्यसभा भेजा. राजनीतिक हलकों में उन्हें दिग्विजय सिंह के करीबी नेताओं में माना जाता है. दूसरी ओर विवेक तन्खा राज्यसभा में दूसरे कार्यकाल के सांसद हैं और कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं.
छत्तीसगढ़ को भी दी गई सीट
मध्य प्रदेश में पहले राज्यसभा की कुल 16 सीटें हुआ करती थीं. हालांकि वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद 5 सीटें नए राज्य को आवंटित कर दी गईं. इसके बाद मध्य प्रदेश के हिस्से में 11 सीटें रह गईं. आमतौर पर जिस दल की राज्य विधानसभा में मजबूत पकड़ होती है, राज्यसभा में भी उसी का प्रतिनिधित्व अधिक होता है. वर्तमान में मध्य प्रदेश में बीजेपी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार है और मोहन यादव मुख्यमंत्री के पद पर हैं. यही कारण है कि राज्यसभा में भी बीजेपी का दबदबा स्पष्ट रूप से दिखाई देता है.







