भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश की राजनीति में मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल को लेकर चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हालिया दिल्ली दौरे और पार्टी के केंद्रीय नेताओं के साथ हुई बैठकों के बाद प्रदेश सरकार की नई टीम को लेकर सियासी हलचल बढ़ गई है। सत्ता और संगठन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, दतिया उपचुनाव, विधानसभा के मानसून सत्र और राज्यसभा से जुड़ी प्रक्रियाओं के बाद अब मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना मजबूत मानी जा रही है। माना जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व की अंतिम सहमति मिलते ही मोहन सरकार के पहले बड़े मंत्रिमंडलीय फेरबदल का ऐलान हो सकता है।
मंत्रियों के प्रदर्शन के आधार पर तैयार हुई रणनीति
सूत्रों के मुताबिक, करीब दो महीने पहले प्रदेश सरकार के मंत्रियों के कामकाज और राजनीतिक सक्रियता का विस्तृत आकलन किया गया था। इस दौरान मंत्रियों की अपने प्रभार वाले जिलों में सक्रियता, विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन, संगठन के साथ समन्वय और जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता जैसे बिंदुओं को प्रमुखता से देखा गया। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने कई मंत्रियों के साथ व्यक्तिगत स्तर पर चर्चा भी की थी। इसके बाद तैयार फीडबैक रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाई गई। अब इसी रिपोर्ट और भविष्य की राजनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल में बदलाव की रणनीति पर काम होने की चर्चा है।
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31 सदस्यीय मंत्रिमंडल में हो सकती है नई एंट्री
वर्तमान में मुख्यमंत्री सहित मोहन यादव मंत्रिमंडल में कुल 31 सदस्य हैं। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार प्रदेश में अधिकतम 35 मंत्रियों का मंत्रिमंडल बनाया जा सकता है। ऐसे में सरकार के पास सीधे तौर पर चार नए सदस्यों को शामिल करने की गुंजाइश मौजूद है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मामला केवल चार नए मंत्रियों की नियुक्ति तक सीमित नहीं रहेगा। कुछ मौजूदा मंत्रियों को हटाकर नए विधायकों को जिम्मेदारी देने का विकल्प भी खुला रखा जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो मंत्रिमंडल में अपेक्षा से बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
इन मंत्रियों के नामों को लेकर चर्चा
पार्टी के अंदर चल रही चर्चाओं और राजनीतिक गलियारों में कुछ मंत्रियों के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठने की बातें सामने आ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, विजय शाह, धर्मेंद्र लोधी, लखन पटेल और प्रतिमा बागरी के नाम संभावित फेरबदल की चर्चाओं में शामिल हैं, जोकि काफी समय से पार्टी संगठन के रडार पर हैं, जबकि विजय शाह की मुश्किलें तो और भी ज्यादा बढ़ी हुई है, क्योंकि सोफिया कुरैशी पर दिए उनके बयान को लेकर आज तक पार्टी कटघरे में खड़ी है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट में एमपी सरकार को जवाब देना है। इन मंत्रियों के राजनीतिक भविष्य का फैसला केंद्रीय नेतृत्व और मुख्यमंत्री स्तर पर होने की संभावना है।
नए चेहरों में इन नेताओं के नाम चर्चा में
मंत्रिमंडल विस्तार के साथ भाजपा क्षेत्रीय, सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश कर सकती है। मंत्री पद की संभावित दौड़ में जिन नेताओं के नाम राजनीतिक हलकों में चर्चा में हैं, उनमें बुंदेलखंड क्षेत्र के वरिष्ठ और अनुभवी नेता गोपाल भार्गव का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। वहीं, अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाले प्रभावशाली विधायक प्रदीप लारिया को भी संभावित दावेदारों में माना जा रहा है। मालवा-निमाड़ क्षेत्र से मजबूत महिला नेतृत्व के तौर पर अर्चना चिटनीस का नाम भी चर्चा में है। इसके अलावा इंदौर क्षेत्र की प्रमुख महिला नेता और पूर्व महापौर मालिनी गौड़ को भी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण चेहरों में गिना जा रहा है।
क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर रहेगा फोकस
संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा का फोकस केवल खाली पद भरने पर नहीं, बल्कि प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों के बीच संतुलन बनाने पर भी रह सकता है। मालवा-निमाड़, बुंदेलखंड, महाकौशल, विंध्य और मध्यभारत के प्रतिनिधित्व को लेकर पार्टी नेतृत्व विशेष रणनीति तैयार कर सकता है। इसके साथ ही महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी और अन्य प्रभावशाली सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने के राजनीतिक समीकरण भी मंत्रिमंडल की नई तस्वीर तय कर सकते हैं।
दिल्ली से अंतिम संकेत का इंतजार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दिल्ली दौरे और केंद्रीय नेतृत्व के साथ हुई बैठकों के बाद अब राजनीतिक नजरें दिल्ली की ओर टिकी हैं। माना जा रहा है कि प्रदेश नेतृत्व और केंद्रीय संगठन के बीच सहमति बनने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख तय की जाएगी।
यदि सब कुछ राजनीतिक रणनीति के अनुसार आगे बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश की मोहन सरकार की टीम में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि अंतिम तस्वीर केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी और आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगी। तब तक प्रदेश की राजनीति में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाओं और अटकलों का दौर जारी रहने की संभावना है।
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