MP Politics: दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की आहट के साथ ही पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का निवास प्रदेश की राजनीति का नया केंद्र बन गया है। कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की अयोग्यता और सीट रिक्त होने के बाद, भाजपा नेताओं का नरोत्तम मिश्रा के पास पहुंचना इस बात का संकेत है कि पार्टी ने दतिया 'मिशन' को लेकर कमर कस ली है।
नरोत्तम के घर नेताओं का तांता
मंगलवार को नरोत्तम मिश्रा के आवास पर भाजपा के दिग्गज नेताओं के पहुंचने का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया था। सबसे पहले भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा ने मुलाकात की, जिसके बाद विधायक शैलेन्द्र जैन ने वहां पहुंचकर लगभग 20 मिनट तक गुप्त मंत्रणा की। सबसे अहम मुलाकात भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ रही, जहां दोनों नेताओं ने बंद कमरे में विस्तृत चर्चा की। इसके तुरंत बाद पूर्व मंत्री रामपाल सिंह भी वहां पहुंचे। लगातार हो रही इन मुलाकातों को सीधे तौर पर दतिया उपचुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

क्यों खाली हुई दतिया सीट?
आपको बता दें कि दतिया में उपचुनाव की स्थिति एक 27 साल पुराने मामले को लेकर बनी। न्यायालय ने वर्तमान कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को एक आपराधिक मामले में 3 साल की सजा सुनाई है। सजा मिलते ही विधानसभा सचिवालय ने दतिया विधानसभा सीट को शून्य घोषित कर दिया है। कानूनी रूप से अब यहां चुनाव आयोग द्वारा उप-चुनाव कराना अनिवार्य है।
नरोत्तम मिश्रा की 'वापसी' की तैयारी!
यह भी बता दें कि साल 2023 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद से ही नरोत्तम मिश्रा की चुनावी राजनीति में सक्रियता को लेकर सस्पेंस बना हुआ था। लेकिन अब दतिया सीट रिक्त होने से समीकरण बदल गए हैं। भाजपा खेमे में चर्चा है कि पार्टी एक बार फिर नरोत्तम मिश्रा पर भरोसा जताकर उन्हें दतिया से मैदान में उतार सकती है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और भाजपा नेताओं की सक्रियता यह दर्शाती है कि पार्टी इस सीट को गंवाने के मूड में नहीं है और पूर्व गृहमंत्री को फिर से सक्रिय राजनीति में लाने का खाका तैयार किया जा रहा है।
क्या कहते है जानकार?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले कुछ दिनों में दतिया में होने वाले संभावित उपचुनाव के लिए भाजपा अपना 'अंतिम दांव' नरोत्तम मिश्रा के रूप में ही खेलने जा रही है। अगर नरोत्तम मिश्रा दतिया फतह करते है तो निश्चित तौर पर उन्हें सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। इसके अलावा जानकारों का यह भी मानना है कि नरोत्तम को राज्यसभा भेजने को लेकर भी ये मेल मिलाप हो सकता है।







