सीहोर/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कोसमी में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने और खेतों में खड़ी फसल नष्ट किए जाने के विरोध में आंदोलन तेज हो गया है। न्याय की मांग को लेकर बड़ी संख्या में आदिवासी सीहोर से राजधानी भोपाल तक पैदल मार्च कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपनी समस्याएं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने रखकर न्याय की गुहार लगाएंगे। पदयात्रा में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हैं। हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर प्रदर्शनकारी शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। कोसमी में वन विकास निगम की कार्रवाई के बाद शुरू हुआ विरोध अब राजधानी तक पहुंचने लगा है। इससे प्रशासन और सरकार का ध्यान इस मामले की ओर खिंच गया है।
मकान टूटे, फसलें बर्बाद होने से बढ़ी परेशानी
कोसमी गांव के प्रभावित आदिवासी परिवारों का आरोप है कि वन विकास निगम की कार्रवाई के दौरान उनके मकानों को तोड़ा गया और खेतों में लगी फसलों को नुकसान पहुंचा। उनका कहना है कि इस कार्रवाई से उनके सामने रहने की जगह और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। प्रभावित परिवारों के मुताबिक, खेती और मकान उनके जीवनयापन के प्रमुख साधन हैं। ऐसे में घरों और फसलों को नुकसान पहुंचने से परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि समस्याओं का समाधान नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
मुख्यमंत्री से मुलाकात कर रखेंगे अपनी मांगें
आदिवासी परिवारों ने अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए सीहोर से भोपाल तक पदयात्रा शुरू की है। आंदोलन में शामिल लोगों का उद्देश्य मुख्यमंत्री से मुलाकात कर कार्रवाई से जुड़ी अपनी शिकायतें बताना और न्याय की मांग करना है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि उनके मामले की सुनवाई हो और प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समाधान निकाला जाए। बड़ी संख्या में लोगों के इस मार्च में शामिल होने से मामला स्थानीय स्तर से आगे बढ़कर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
बैनर-तख्तियों के साथ आगे बढ़ रहे प्रदर्शनकारी
भोपाल की ओर बढ़ रही पदयात्रा में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी दिखाई दे रही है। प्रदर्शनकारी अपने अधिकारों और मांगों के समर्थन में नारे लगा रहे हैं। पदयात्रा के साथ डीजे वाहन भी चल रहे हैं, जबकि व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात है। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखना भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है। पदयात्रा में शामिल लोगों की संख्या को देखते हुए आगे की व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है।
अब सरकार के रुख पर टिकी निगाहें
कोसमी के आदिवासी परिवारों का आंदोलन अब सरकार के सामने उनकी समस्याओं को सुनने और समाधान निकालने की चुनौती पेश कर रहा है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि उनकी शिकायतों पर गंभीरता से विचार किया जाए और उन्हें न्याय मिले। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भोपाल पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों की मुख्यमंत्री या शासन के प्रतिनिधियों से मुलाकात हो पाती है या नहीं। साथ ही, सरकार और प्रशासन उनकी मांगों पर क्या कदम उठाते हैं, यह भी महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल, प्रभावित परिवार अपनी मांगों को लेकर पदयात्रा जारी रखे हुए हैं।







