डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडौरी, मौत कब और किस रूप में सामने आ जाए, कोई नहीं जानता। शनिवार के दिन खरमेर नदी पर बने स्टॉप डैम को पार करते वक्त जलप्रलय का रूप ले चुकी नदी ने एक 52 वर्षीय किसान को अपनी आगोश में ले लिया। भांजा आंखों के सामने मामा को बहते देखता रह गया और लाचार होकर सिर्फ चीखता रहा। दो दिनों तक चले, रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद आखिरकार सोमवार को 42 घंटे बाद किसान का बेजान शरीर पानी से बाहर निकाला जा सका।
बारिश का पानी और वो कातिल पुलिया
भपसा गांव के रहने वाले 52 वर्षीय कुंदन यादव (पिता तितरा यादव) शनिवार दोपहर अपने भांजे सोनू लाल यादव के साथ पास के ही डुंगरिया गांव से अपने घर लौट रहे थे। रास्ते में खरमेर नदी पर बना स्टॉप डैम पड़ा, जिसकी पुलिया के ऊपर से उफनता पानी काल बनकर बह रहा था। सोनू रास्ते का अंदाज़ा लगाते हुए आगे निकल गया और मामा कुंदन पीछे-पीछे चल रहे थे।
अभी कुछ ही कदम का फासला तय हुआ था कि नदी के प्रचंड वेग ने कुंदन के पैर उखाड़ दिए। जब सोनू ने मुड़कर देखा, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई—मामा उफनती नदी की धार में जिंदगी की जंग हार रहे थे। सोनू के शोर मचाते ही ग्रामीण दौड़े, लेकिन पानी का भयानक रूप देखकर किसी की आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं हुई।
अंधेरे और तेज बहाव से SDRF की जंग
हादसे की खबर मिलते ही सिटी कोतवाली थाना प्रभारी दुर्गा प्रसाद नगपुरे अपनी टीम और SDRF के जांबाज रेस्क्यू दल के साथ दोपहर 3 बजे मौके पर पहुंचे। इसके बाद शुरू हुआ 42 घंटे का वो संघर्ष, जिसने पूरे इलाके की सांसें थाम दीं:
शनिवार का सन्नाटा:
ढलती शाम के साथ नदी का रौद्र रूप और गहराता अंधेरा रेस्क्यू में रोड़ा बन गया। मजबूरी में शनिवार रात को ऑपरेशन रोकना पड़ा।
रविवार का कड़ा इम्तिहान: सुबह की पहली किरण के साथ ही बारिश की परवाह किए बिना SDRF की बोट्स नदी के तेज थपेड़ों से जूझती रहीं, लेकिन कामयाबी हाथ नहीं लगी।
सोमवार की दुखद समाप्ति:
सोमवार को 42 घंटे के लंबे इंतजार के बाद गोताखोरों ने कुंदन यादव के शव को नदी से ढूंढ निकाला।
गांव में पसरा मातम
शव मिलते ही भपसा गांव में चीख-पुकार मच गई। परिवार का सहारा छीन जाने से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर शव का पंचनामा तैयार किया और पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उफनती नदियों और पुलियों को हलके में लेना जिंदगी पर कितना भारी पड़ सकता है।







