खबर डिजिटल कटनी-- शहर में लगातार हो रही बारिश के बीच जर्जर भवनों को लेकर नगर निगम की तैयारियों और निगरानी व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शनिवार दोपहर रंगनाथ नगर थाना क्षेत्र के मिशन चौक स्थित बजाज एजेंसी के सामने एक जर्जर मकान का बारजा अचानक भरभराकर ढह गया। हादसे में बारजे पर खड़े प्रौढ़ प्रेम लाल, पिता लूसन प्रसाद गड़ारी की मलबे में दबने और गंभीर चोट लगने से मौके पर ही मौत हो गई।बताया गया कि प्रेम लाल सागर पुलिया के पास स्थित अग्रवाल बिल्डिंग में किराए के मकान में रहते थे। पिछले तीन दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश के बीच भवन की हालत और खराब होने की बात सामने आई है। शनिवार दोपहर प्रेम लाल बारजे पर खड़े थे, तभी अचानक जर्जर बारजा भरभराकर नीचे आ गिरा। वे भी उसके साथ नीचे जा गिरे और मलबे की चपेट में आ गए।बारिश से पहले जर्जर भवनों की पहचान का दावा, फिर यह भवन नजर से कैसे छूट गया?हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल अब नगर निगम की निगरानी व्यवस्था को लेकर खड़ा हो रहा है। बारिश के मौसम से पहले जर्जर भवनों को चिन्हित करने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाने के बावजूद शहर के मुख्य आवागमन वाले इलाके में स्थित इस भवन की जर्जर स्थिति पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई?स्थानीय लोगों का कहना है कि यह भवन लंबे समय से जर्जर हालत में था। ऐसे में सवाल यह भी है कि यदि भवन वास्तव में खतरनाक स्थिति में था, तो उसे चिन्हित कर लोगों को चेतावनी देने, हिस्से को सुरक्षित कराने या आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया पहले क्यों नहीं अपनाई गई?अधिकारियों-कर्मचारियों की आवाजाही वाले मार्ग पर खड़ा था जर्जर भवनमिशन चौक और आसपास का क्षेत्र शहर के व्यस्त हिस्सों में शामिल है। इस मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है। नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारियों की भी इस क्षेत्र से आवाजाही रहती है। इसके बावजूद जर्जर भवन लंबे समय तक खड़ा रहा और शनिवार को उसका बारजा एक व्यक्ति की जान ले गया।अब सवाल सिर्फ एक हादसे का नहीं, बल्कि जर्जर भवनों की निगरानी, चिन्हांकन और समय रहते कार्रवाई की पूरी व्यवस्था का है।क्या हादसे का इंतजार कर रहा था सिस्टम?बारिश के दौरान जर्जर भवनों से हादसे की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में नगर निगम की जिम्मेदारी सिर्फ निर्देश जारी करने तक सीमित नहीं रह सकती। हादसे के बाद अब यह जांच का विषय है कि संबंधित भवन का कभी सर्वे हुआ था या नहीं, उसे जर्जर अथवा खतरनाक घोषित किया गया था या नहीं और यदि भवन की स्थिति पहले से खराब थी तो उसे सुरक्षित करने के लिए क्या कार्रवाई की गई थी।एक प्रौढ़ की मौत के बाद अब जवाबदेही तय होगी या मामला सिर्फ पंचनामा और पोस्टमार्टम तक सिमट जाएगा? यह सवाल हादसे के बाद शहरवासियों के बीच चर्चा में है।पुलिस ने शुरू की जांचहादसे की सूचना मिलते ही रंगनाथ नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों की मदद से मलबा हटाकर प्रेम लाल को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा है। पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है।अब हादसे के वास्तविक कारणों के साथ-साथ भवन की जर्जर स्थिति और संबंधित विभाग द्वारा की गई कार्रवाई की भी जांच जरूरी मानी जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस हादसे को समय रहते टाला जा सकता था या नहीं।
जर्जर बारजा बना मौत का मलबा, एक जिंदगी खत्म—नगर निगम की निगरानी पर उठे सवालतीन दिन की बारिश में भरभराकर गिरा जर्जर मकान का छज्जा, मलबे में दबने से प्रौढ़ की दर्दनाक मौत
Khabar Digital Desk
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