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कटनी- शहर से लेकर गांवों तक सड़कों पर जिंदगी से खिलवाड़ का खतरनाक खेल खुलेआम जारी है। माल ढोने के लिए बने वाहनों में इंसानों को भूसे की तरह भरकर ले जाया जा रहा है। किसी की जान जाए या परिवार उजड़ जाए, इसकी परवाह न तो ऐसे वाहन चालकों को नजर आ रही है और न ही इन पर प्रभावी अंकुश लगाने की जिम्मेदारी निभाने वाले विभागों की कार्रवाई का असर सड़कों पर दिखाई दे रहा है। सवाल सीधा है—क्या कटनी की सड़कों पर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?तस्वीर ने खोली लापरवाही की पोलहाल ही में सामने आई एक तस्वीर ने यातायात व्यवस्था और सुरक्षा के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तस्वीर में मिनी पिकअप/कमर्शियल लोड कैरियर क्रमांक MP54ZA8576 के खुले डाले में बड़ी संख्या में लोग सवार दिखाई दे रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि वाहन के भीतर जगह कम पड़ने पर लोग किनारों पर लटककर सफर करते नजर आते हैं। जरा-सी चूक, अचानक ब्रेक या वाहन का संतुलन बिगड़ना कई परिवारों के लिए जिंदगी भर का दर्द बन सकता है।यह कोई सामान्य यातायात उल्लंघन नहीं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा को सीधे खतरे में डालने वाला गंभीर मामला है। सवाल यह भी है कि यदि सड़क पर इस तरह वाहन दौड़ रहे हैं, तो नियमित जांच और निगरानी आखिर किस स्तर पर हो रही है?हादसा हुआ तो जिम्मेदारी किसकी?मालवाहक वाहन सामान ढोने के लिए बनाए जाते हैं, यात्रियों को असुरक्षित तरीके से ले जाने के लिए नहीं। खुले डाले में बैठे लोगों के पास न पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था होती है और न ही गिरने से बचाव का कोई भरोसेमंद इंतजाम। तेज रफ्तार, अचानक ब्रेक, खराब सड़क या मोड़ पर असंतुलन की स्थिति में जानलेवा हादसे की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नियमों का उल्लंघन सड़कों पर दिखाई दे रहा है, तो जिम्मेदार विभाग समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं कर पा रहे हैं? क्या कार्रवाई केवल कागजों, अभियानों और आंकड़ों तक सीमित रह जाएगी, या वास्तव में सड़क पर उतरकर ऐसे वाहनों पर लगाम लगाई जाएगी?मजबूरी का फायदा या व्यवस्था की नाकामी?ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, मजदूरी और साप्ताहिक बाजारों तक पहुंचने के लिए सस्ते परिवहन की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन परिवहन की कमी का समाधान लोगों की जान जोखिम में डालना नहीं हो सकता। सुरक्षित और किफायती यात्री परिवहन की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी व्यवस्था की अहम जिम्मेदारी है।यदि लोग मजबूरी में मालवाहकों में सफर कर रहे हैं, तो परिवहन विभाग और स्थानीय प्रशासन को इस समस्या की जड़ तक पहुंचना होगा। केवल यात्रियों को दोषी ठहराकर या एक-दो चालान काटकर जिम्मेदारी पूरी नहीं की जा सकती।अब चालान नहीं, ठोस कार्रवाई की जरूरतपरिवहन विभाग और यातायात पुलिस को ऐसे मामलों में नियमानुसार तत्काल जांच, वाहन चालक के विरुद्ध कार्रवाई और वाहन की वैधानिक स्थिति की पड़ताल करनी चाहिए। जहां कानून के तहत आवश्यक हो, वहां परमिट, पंजीकरण और अन्य अनुमतियों के संबंध में भी सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। साथ ही ग्रामीण मार्गों पर सुरक्षित यात्री परिवहन के विकल्प बढ़ाने की दिशा में भी काम जरूरी है।कटनी की सड़कों पर जिंदगी को इस तरह दांव पर लगाने का सिलसिला आखिर कब रुकेगा? क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना के बाद जागेगा, या उससे पहले ही जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करेंगे? यह सवाल अब केवल यातायात व्यवस्था का नहीं, बल्कि आम नागरिकों की जिंदगी और सुरक्षा का है।फिलहाल जरूरत साफ है—सड़क पर सख्ती, नियमों का प्रभावी पालन और ऐसी व्यवस्था, जिसमें किसी गरीब या मजबूर यात्री को मंजिल तक पहुंचने के लिए अपनी जान जोखिम में न डालनी पड़े।







