सिवनी/ खबर डिजिटल/ संतोष वन्देवार/ स्वास्थ्य विभाग में नियम-कानूनों को ताक पर रखकर अपनी मर्जी चलाने और तानाशाही रवैया अपनाने का एक बड़ा मामला सामने आया है। मामला कलारबाकी उप स्वास्थ्य केंद्र का है, जहां विभाग की 'हिटलरशाही' और घोर लापरवाही के चलते राजस्व को मटियामेट कर दिया गया। यहां उप स्वास्थ्य केंद्र की पुरानी डिस्मेंटल बिल्डिंग को तोड़ने के बाद, उसमें से निकली लाखों रुपये की सरकारी सामग्री को कौड़ियों के भाव बेच दिया गया।
न निविदा निकाली, न कराया सरकारी वैल्यूएशन
नियमों के मुताबिक, किसी भी सरकारी भवन के ध्वस्त होने के बाद उसकी सामग्री की नीलामी के लिए बाकायदा लोक निर्माण विभाग या संबंधित विभाग से मूल्यांकन कराया जाता है। इसके बाद सार्वजनिक निविदा आमंत्रित की जाती है, ताकि सरकार को अधिकतम राजस्व मिल सके।
लेकिन कलार बाकी में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने खुद को ही सर्वेसर्वा मान लिया। बिना किसी आधिकारिक वैल्यूएशन और बिना कोई निविदा जारी किए, अधिकारियों ने आपसी साठगांठ कर लाखों रुपये के लोहे के चैनल गेट, कीमती खिड़कियां, दरवाजे और अन्य कबाड़ सामग्री मात्र ₹13,000 में एक निजी हाथ में सौंप दी।
अंधेरगर्दी: बाजार कीमत लाखों में, विभाग को दिखे सिर्फ 13 हजार
स्थानीय ग्रामीणों और जानकारों की मानें तो बिल्डिंग से निकले भारी-भरकम लोहे के चैनल गेट, मजबूत लकड़ी के दरवाजे और खिड़कियों की आज के बाजार भाव से कीमत लाखों रुपये में है। अगर इसकी नियमानुसार खुली नीलामी होती, तो सरकार के खाते में मोटी रकम जमा होती। परंतु विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने सरकारी खजाने को चूना लगाते हुए इस पूरी सामग्री को महज 13 हजार रुपये में रफा-दफा कर दिया।
भ्रष्टाचार और तानाशाही की बू, उठ रहे गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं किसके आदेश पर बिना टेंडर के सरकारी संपत्ति को बेचा गया? ₹13,000 की इस कथित 'डील' की रकम किसके खाते में गई या यह केवल कागजी खानापूर्ति है? इतनी बड़ी लापरवाही पर विभाग के उच्च अधिकारी मौन क्यों हैं? इस मामले को लेकर अब स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया है और ग्रामीणों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।







