मुरैना/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में एक और महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। मुरैना जिले की लंबे समय से बंद पड़ी कैलारस शुगर मिल को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। राज्य सरकार ने मिल के पुनरुद्धार और संचालन के लिए इच्छुक कंपनियों एवं निवेशकों से रुचि की अभिव्यक्ति (EOI) आमंत्रित की है। सरकार का मानना है कि कैलारस शुगर मिल के दोबारा शुरू होने से क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलेगी। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आसपास के क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
15 सितंबर तक जमा होंगे ऑनलाइन प्रस्ताव
एमएसएमई विभाग के अनुसार कैलारस शुगर मिल के संचालन के लिए इच्छुक कंपनियों से ऑनलाइन प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं। रुचि की अभिव्यक्ति जमा करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर, शाम 5 बजे निर्धारित की गई है। इसके बाद प्राप्त प्रस्तावों को 16 सितंबर को शाम 5 बजे खोला जाएगा। कैलारस चीनी मिल के पुनरुद्धार का फैसला राज्य सरकार के पूर्व निर्णय के तहत लिया गया है। गौरतलब है कि 19 अगस्त 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मिल की भूमि को एमएसएमई विभाग को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया गया था। अब विभाग इस संपत्ति के बेहतर औद्योगिक उपयोग के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी तलाश रहा है।
‘जैसी है, जहां है’ के आधार पर मिलेगी लीज
एमएसएमई विभाग मिल को ‘जैसी है, जहां है’ के आधार पर लीज पर देने की तैयारी कर रहा है। इच्छुक निवेशक और कंपनियां 31 अगस्त और 1 सितंबर को सुबह 11 बजे कैलारस शुगर मिल परिसर का निरीक्षण कर सकेंगी। लीज प्रक्रिया और प्रस्ताव से संबंधित जानकारी देने के लिए 3 सितंबर को दोपहर 3 बजे बैठक आयोजित की जाएगी। यह बैठक भोपाल स्थित विंध्याचल भवन की चौथी मंजिल के मीटिंग हॉल में होगी। प्रक्रिया से जुड़े किसी भी बिंदु पर लिखित सवाल पूछने के लिए इच्छुक पक्षों को 7 सितंबर, शाम 5 बजे तक का समय दिया गया है।
1250 टीसीडी क्षमता वाली है शुगर मिल
कैलारस शुगर मिल चीनी और उससे जुड़े उप-उत्पादों के निर्माण के लिए स्थापित की गई थी। मिल की क्षमता प्रतिदिन 1,250 टन गन्ने की पेराई की है। यह परिसर एनएच-552 पर स्थित है और कैलारस रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी 3 किलोमीटर से भी कम है। मिल की संपत्तियों में फैक्ट्री भवन, प्लांट और मशीनरी, गोदाम, वर्कशॉप तथा लगभग 12.86 हेक्टेयर भूमि शामिल है। ऐसे में यहां चीनी उत्पादन के साथ अन्य संबंधित औद्योगिक गतिविधियों की संभावनाएं भी देखी जा रही हैं।
30 साल के लिए होगी लीज
सरकार मिल और उससे जुड़ी संपत्तियों को 30 वर्ष की लीज पर देने की योजना बना रही है। कार्य और संचालन संतोषजनक पाए जाने पर लीज अवधि को आगे बढ़ाने का प्रावधान भी रखा गया है। शुगर उद्योग और उससे जुड़े उप-उत्पादों के निर्माण का अनुभव रखने वाली कंपनियां एमपी टेंडर्स पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं। विस्तृत जानकारी एमएसएमई विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है। कैलारस शुगर मिल के पुनः संचालन को मुरैना जिले के औद्योगिक विकास के लिए अहम कदम माना जा रहा है। यदि मिल दोबारा उत्पादन शुरू करती है तो क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ स्थानीय कारोबार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई ऊर्जा मिल सकती है।
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