बिहार के जमुई में नाबालिग लड़की से छेड़छाड़ के मामले को लेकर पीड़िता के माता-पिता ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की. परिवार ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी बेटी के साथ हुई घटना का मुद्दा उठाते हुए आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की. पीड़िता की मां ने कहा कि जिस तरह उनकी बेटी को डर और तकलीफ से गुजरना पड़ा, वैसा ही एहसास दोषियों को भी होना चाहिए, ताकि ऐसे अपराध करने वालों में कानून का डर पैदा हो.
24 से 48 घंटे में हुई कार्रवाई से परिवार संतुष्ट
पीड़िता की मां ने बिहार सरकार और पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई पर संतोष जताया. उन्होंने बताया कि घटना सामने आने के बाद पुलिस ने तेजी से कदम उठाए. मां के मुताबिक, 24 से 48 घंटे के भीतर कार्रवाई शुरू हो गई थी. पहले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और इसके बाद कथित मुख्य आरोपी को मुठभेड़ के बाद पकड़ा गया.
उन्होंने कहा, '24-48 घंटों के भीतर कार्रवाई की गई. पहले तीन आरोपियों को पकड़ा गया, और फिर एक मुठभेड़ के बाद मुख्य आरोपी को पकड़ा गया. मैं सरकार द्वारा की गई कार्रवाई से संतुष्ट हूं.'
CM ने बेटी की सुरक्षा और पढ़ाई का दिया भरोसा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात के दौरान परिवार को बेटी की सुरक्षा और शिक्षा को लेकर भी भरोसा दिया गया. पीड़िता की मां ने बताया कि मुख्यमंत्री ने परिवार को मिलने के लिए बुलाया था और उनकी बेटी की सुरक्षा, पढ़ाई समेत हर जरूरी मदद का आश्वासन दिया.
उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री ने हमें यहां बुलाया था. उन्होंने हमें उसकी सुरक्षा, शिक्षा और हर चीज का भरोसा दिया है. उन्होंने हमसे कहा है कि हमारी बेटी उनकी बेटी जैसी है और हमें आश्वासन दिया है.'
मां ने घटना को याद करते हुए कहा कि उनकी बेटी जिस मानसिक पीड़ा से गुजरी, उसे शब्दों में बताना मुश्किल है. उन्होंने कहा, 'मेरी बेटी के साथ जो हुआ, वह किसी और के साथ नहीं होना चाहिए. मेरी बेटी गिड़गिड़ा रही थी. उन दोषियों को भी अब गिड़गिड़ाना चाहिए. ऐसे अपराधियों में डर पैदा करने के लिए कुछ किया जाना चाहिए.'
19 सितंबर की घटना, वीडियो वायरल होने के बाद सामने आया मामला
पुलिस के मुताबिक, यह घटना कथित तौर पर 19 सितंबर को हुई थी. उस समय दो नाबालिग लड़कियां कोचिंग क्लास से वापस लौट रही थीं. घटना से जुड़ा कथित वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया.
जमुई के पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल ने बताया था कि पुलिस को 21 सितंबर को वायरल वीडियो के जरिए घटना की जानकारी मिली. इसके बाद FIR दर्ज कर मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया.
POCSO के तहत केस, वीडियो फैलाने वालों पर भी कार्रवाई
मामले में शुरुआत में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था. बाद में बिहार के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था केएस अनुपम ने कथित मुख्य आरोपी नंदन यादव और उसके साथियों की गिरफ्तारी की पुष्टि की. पुलिस ने POCSO यानी बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है. अधिकारियों के अनुसार, नाबालिगों से जुड़े वीडियो या फुटेज को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है. राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी मामले का स्वतः संज्ञान लिया है.







