जबलपुर। बुधवार को इंडिया गठबंधन की एक अहम और निर्णायक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य देश में संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर मंडरा रहे खतरों के खिलाफ एक मजबूत राष्ट्रीय विरोध आंदोलन खड़ा करना था। कार्यक्रम में कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी (CPM व CPI), समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय समानता दल और राष्ट्रीय जनता दल के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा सर्वजाति सेवा संघ, आवाक्स संगठन, भारतीय बौद्ध महासभा, सम्राट अशोक क्रांति सेना, लोधी समाज, कुशवाहा समाज और संयुक्त संघर्ष समिति जैसे कई प्रमुख सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी भी एकजुट हुए।
स्थानीय स्तर पर विरोध की रणनीति
बैठक में मुख्य रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि जो कार्यकर्ता और आम नागरिक दिल्ली के केंद्रीय प्रदर्शन में शामिल नहीं हो पा रहे हैं, वे जबलपुर में रहकर ही अपना विरोध दर्ज कराएं। केंद्र सरकार की कथित मनमानी, अन्यायपूर्ण नीतियों और जनविरोधी अत्याचारों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर जनआक्रोश को आवाज देने की रणनीति तैयार की गई। नेताओं ने साफ किया कि जबलपुर की आवाज पूरे देश में गूंजनी चाहिए ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके।
मशाल जुलूस और टाउन हॉल में धरने का प्रस्ताव
आंदोलन को प्रभावी बनाने के लिए बैठक में कई सुझाव पेश किए गए। इनमें मालवीय चौक से एक विशाल मशाल जुलूस निकालने और ऐतिहासिक टाउन हॉल के समक्ष अनिश्चितकालीन या व्यापक धरना प्रदर्शन आयोजित करने का प्रस्ताव शामिल है। विपक्षी नेताओं का मानना है कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से जनता को संविधान की रक्षा के प्रति जागरूक किया जा सकता है।
अंतिम निर्णय के बाद जारी होगा विस्तृत कार्यक्रम
बैठक में आए सभी व्यावहारिक सुझावों पर गंभीरता से मंथन किया जा रहा है। गठबंधन के नेताओं ने बताया कि जल्द ही सभी सर्वसम्मति से अंतिम रूप देकर विरोध प्रदर्शन की तिथियों और रूपरेखा का आधिकारिक ऐलान करेंगे। जबलपुर में आयोजित होने वाला यह प्रदर्शन उन सभी लोगों को एक सशक्त मंच प्रदान करेगा, जो दिल्ली की महारैली में शामिल नहीं हो सके हैं।







