विश्व आर्किटेक्चर डे पर आईआईए भोपाल का आयोजन: वास्तुकला के भविष्य, सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कारीगरी पर हुआ मंथन

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विश्व आर्किटेक्चर डे पर आईआईए भोपाल का आयोजन: वास्तुकला के भविष्य, सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कारीगरी पर हुआ मंथन
  • मिंटो हॉल में आर्किटेक्ट्स, शहरी नियोजकों और विद्यार्थियों की सहभागिता; लाइव क्राफ्ट डिमॉन्स्ट्रेशन रहा आकर्षण का केंद्र

भोपाल। वास्तुकला केवल ईंट, गारे और पत्थरों से इमारतें खड़ी करने की कला नहीं, बल्कि समाज की संस्कृति, मानवीय गरिमा और पर्यावरण के भविष्य को आकार देने का माध्यम है। इसी विचार के साथ द इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स (आईआईए), भोपाल सेंटर द्वारा रविवार शाम ऐतिहासिक कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में विश्व आर्किटेक्चर डे 2026 की पूर्व संध्या पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस वर्ष 5 अक्टूबर को मनाए जाने वाले विश्व आर्किटेक्चर डे की वैश्विक थीम ‘हाउसिंग इज़ अ ह्यूमन राइट, बिल्ड इट’ (Housing is a Human Right, Build It) को केंद्र में रखते हुए आयोजित कार्यक्रम में शहर के वरिष्ठ वास्तुविदों, शहरी नियोजकों, डिजाइनरों, आर्किटेक्चर प्रोफेशनल्स और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में टिकाऊ एवं समावेशी वास्तुकला, स्थानीय सांस्कृतिक विरासत और भविष्य के बिल्ट एन्वायरनमेंट पर व्यापक चर्चा हुई।

आईआईए भोपाल सेंटर के नवनियुक्त चेयरमैन आर्किटेक्ट हेमंत विश्वकर्मा ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधरोपण के साथ की गई। उन्होंने कहा कि आज वास्तुकला के सामने केवल सुंदर और आधुनिक भवन तैयार करने की चुनौती नहीं है, बल्कि बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच ऐसे शहर और आवासीय वातावरण तैयार करना भी जरूरी है, जो टिकाऊ, समावेशी, सुलभ और मानवीय हों।

पारंपरिक कारीगरी से आधुनिक वास्तुकला का संगम

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण ‘लाइव क्राफ्ट डिमॉन्स्ट्रेशन’ रहा। इसमें पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक स्थापत्य कला के बीच संबंध को प्रत्यक्ष रूप से प्रदर्शित किया गया। कारपेंट्री, फैब्रिकेशन, पॉटरी और आधुनिक टेक्सचर वॉल के साथ भोपाल की पारंपरिक पहचान जरी-जरदोजी के कुशल कारीगरों ने लाइव डेमो दिया।

इस दौरान वास्तुकारों और विद्यार्थियों को निर्माण सामग्री तथा शिल्प की बारीकियों से परिचित कराया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि स्थानीय सामग्री, तकनीक और कारीगरी की समझ वास्तुकार को अधिक संवेदनशील और टिकाऊ डिजाइन विकसित करने में मदद करती है। आधुनिक वास्तुकला और पारंपरिक शिल्प के बीच बेहतर समन्वय से स्थानीय पहचान को बनाए रखते हुए नए निर्माण को अधिक अर्थपूर्ण बनाया जा सकता है।

आईआईए की संस्थागत एवं छात्र सदस्यता की घोषणा

कार्यक्रम के दौरान आईआईए भोपाल सेंटर की संस्थागत एवं छात्र सदस्यता की भी घोषणा की गई। साथ ही सेंटर के सुनियोजित एवं समग्र विकास के लिए मास्टर प्लान को लेकर आगामी रणनीतिक बैठकों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। युवा वास्तु विद्यार्थियों को रचनात्मक मंच देने के उद्देश्य से फोटोग्राफी और स्केचिंग प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया।

वरिष्ठ वास्तुविदों ने साझा किए अनुभव

कार्यक्रम के प्रमुख सत्र ‘इन कन्वर्सेशन विद सीनियर आर्किटेक्ट्स’ में शहर के दो वरिष्ठ वास्तुविदों ने बदलते दौर में भारतीय वास्तुकला की दिशा और चुनौतियों पर अपने अनुभव साझा किए। बातचीत में भारतीय संदर्भ में आधुनिक वास्तुकला, स्थानीय पहचान, विरासत संरक्षण और भविष्य की शहरी जरूरतों जैसे विषयों पर विचार रखे गए।

क्विज में परखी स्थापत्य विरासत की जानकारी

कार्यक्रम को रोचक और ज्ञानवर्धक बनाने के लिए बहु-चरणीय आर्किटेक्चर क्विज और नॉलेज पार्टनर गतिविधि ‘नो योर आर्किटेक्ट्स’ आयोजित की गई। इसमें ऐतिहासिक एवं समकालीन वास्तुकला, स्थानीय विरासत और भोपाल की शहरी बनावट से जुड़े सवाल पूछे गए।

क्विज में भोपाल और मध्य प्रदेश की स्थापत्य विरासत पर विशेष जोर रहा। प्रतिभागियों से गौहर महल, जामा मस्जिद, फतेहगढ़ किला, भारत भवन, शौर्य स्मारक, सांची और खजुराहो जैसे प्रमुख ऐतिहासिक एवं स्थापत्य स्थलों से जुड़े प्रश्न पूछे गए। प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और विभिन्न चरणों में अपने वास्तु एवं विरासत संबंधी ज्ञान का प्रदर्शन किया।

ऐतिहासिक विरासत पर विशेष वीडियो शोकेस

समारोह के दौरान भोपाल की एक प्रतिष्ठित ऐतिहासिक विरासत इमारत पर केंद्रित विशेष वीडियो शोकेस भी प्रस्तुत किया गया। इसके माध्यम से शहर की स्थापत्य विरासत, ऐतिहासिक महत्व और संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित किया गया।

कार्यक्रम के समापन पर विभिन्न प्रतियोगिताओं और क्विज के विजेताओं को सम्मानित किया गया। आईआईए भोपाल सेंटर ने कार्यक्रम में शामिल वरिष्ठ वास्तुविदों, विशेषज्ञों, विद्यार्थियों और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। सेंटर की ओर से भोपाल की स्थापत्य पहचान, सांस्कृतिक विरासत, शहरी सौंदर्य और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भविष्य में भी रचनात्मक पहल जारी रखने का संकल्प दोहराया गया।

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