गोदरेज एग्रोवेट ने मध्य प्रदेश में मक्का किसानों के लिए लॉन्च किए दो नए प्रॉडक्ट - 'अशिताका' (Ashitaka) और ' टकाई' (TAKAI)

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krishna kant

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गोदरेज एग्रोवेट ने मध्य प्रदेश में मक्का किसानों के लिए लॉन्च किए दो नए प्रॉडक्ट - 'अशिताका' (Ashitaka) और ' टकाई' (TAKAI)
  • अशिताका: मक्के की फसल के लिए एक खरपतवार नाशक (herbicide) है, जो घास और चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों को नियंत्रित करता है।
  • टकाई: कई फसलों में इस्तेमाल होने वाला एक कीटनाशक (insecticide) है, जो मक्के में लगने वाले 'फॉल आर्मीवॉर्म' (Fall Armyworm) कीट के खिलाफ बेहद असरदार है।
  • इन्हें जापान की ISK कंपनी के सहयोग से विकसित किया गया है।

जबलपुर: मध्य प्रदेश में मक्के की बुआई का सीजन शुरू होने और मध्य भारत में बढ़ते कीट व खरपतवार की चुनौतियों को देखते हुए, भारत की अग्रणी कृषि-व्यवसाय कंपनियों में से एक, गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड (Godrej Agrovet) ने आज 'अशिताका' (Ashitaka) और ' टकाई' (TAKAI) को लॉन्च करने की घोषणा की। जापान की ISK कंपनी के सहयोग से विकसित किए गए ये दोनों आधुनिक उत्पाद मध्य प्रदेश के मक्का किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।

मध्य प्रदेश भारत के प्रमुख मक्का उत्पादक राज्यों में से एक है, जहाँ 15 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि पर मक्के की खेती होती है। यह राज्य देश के कुल मक्का उत्पादन में बड़ा योगदान देता है। इसके बावजूद, यहाँ उत्पादकता लगभग 2.8 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है, जो वैश्विक मानकों से काफी कम है। इस कम पैदावार का मुख्य कारण शुरुआती दौर में खरपतवार का होना है, जिससे फसल का उत्पादन 25-30% तक घट जाता है। इसके अलावा 'फॉल आर्मीवॉर्म' जैसे कीटों के हमले से भी फसल को भारी नुकसान होता है, और गंभीर मामलों में यह नुकसान और भी ज्यादा बढ़ जाता है।

दो नए प्रॉडक्ट की लॉन्चिंग पर टिप्पणी करते हुए, एन.के. राजावेलु (CEO – क्रॉप केयर बिजनेस, गोदरेज एग्रोवेट) ने कहा: "गोदरेज एग्रोवेट में हमारा ध्यान ऐसे रिसर्च-आधारित समाधान देने पर है जो किसानों की जमीनी समस्याओं को दूर कर सकें। मध्य प्रदेश मक्के की खेती का एक प्रमुख केंद्र है, और 'अशिताका' व 'टकाई' की लॉन्चिंग किसानों को सुरक्षित और प्रभावी फसल सुरक्षा देने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। फसल चक्र के दौरान खरपतवार और कीटों दोनों पर नियंत्रण पाकर, ये उत्पाद किसानों की उत्पादकता बढ़ाएंगे, फसलों को मजबूत बनाएंगे और किसानों को एक स्थिर आय दिलाने में मदद करेंगे।"

'अशिताका' को ऐसे महत्वपूर्ण समय पर लॉन्च किया गया है, जब फसल की शुरुआती मजबूती के लिए खरपतवार प्रबंधन बेहद जरूरी है। अशिटाका मक्के के लिए एक चुनिंदा खरपतवार नाशक है जो घास और चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों को प्रभावी ढंग से रोकता है। जब खरपतवार में 2 से 4 पत्तियां हों, तब 400 मिलीलीटर/एकड़ सरफेक्टेंट (surfactant) के साथ 50 मिलीलीटर/एकड़ की अनुशंसित मात्रा में इसका छिड़काव करने से फसल और खरपतवार की होड़ कम हो जाती है। इससे फसल को मिट्टी की नमी और पोषक तत्व बेहतर तरीके से मिलते हैं, जिससे मुख्य चरणों में पौधे का विकास अच्छा होता है। यह 50ml और 100ml के पैक में उपलब्ध होगा। जिन किसानों के पास 2 एकड़ मक्के की जमीन है, उनके लिए 100ml का पैक खरीदना किफायती रहेगा।

कीटों की समस्या से निपटने के लिए, गोदरेज एग्रोवेट ने 'टकाई' (TAKAI) कीटनाशक भी पेश किया है। यह जापान की ISK द्वारा विकसित आधुनिक साइक्लाप्रिन™ (Cyclapryn™) टेक्नोलॉजी पर आधारित है। टकाई 'फॉल आर्मीवॉर्म' के खिलाफ बेहद असरदार है, जो मक्के की फसल को भारी नुकसान पहुँचाने के लिए जाना जाता है। फसल की वानस्पतिक अवस्था (vegetative stage) के दौरान 160 मिलीलीटर/एकड़ की दर से इसका इस्तेमाल करने पर, यह कीटों को तुरंत खाना बंद करा देता है और लंबे समय तक सुरक्षा देता है, जिससे फसल सुरक्षित रहती है और पैदावार स्थिर होती है।

एक साथ मिलकर, 'अशिताका' और 'टकाई' मक्का किसानों के लिए एक-दूसरे के पूरक के रूप में काम करते हैं। ये पूरे फसल चक्र के दौरान खरपतवार और कीटों के खतरों को दूर कर बेहतर और मुनाफेदार परिणाम सुनिश्चित करते हैं।

अनिल चौबे (GM – मार्केटिंग, क्रॉप केयर बिजनेस, गोदरेज एग्रोवेट) ने आगे कहा: "अशिताका और टकाई को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे मक्का किसानों के लिए मिलकर काम कर सकें। जहाँ अशिताका शुरुआती दौर में खरपतवार को रोककर फसल को बेहतर ढंग से स्थापित करता है, वहीं टकाई फसल के बढ़ने के महत्वपूर्ण चरणों में फॉल आर्मीवॉर्म जैसे खतरनाक कीटों से सुरक्षा देता है। यह एकीकृत तरीका फसल के नुकसान को कम करता है, पौधों के स्वास्थ्य को सुधारता है और किसानों को बेहतर व उच्च गुणवत्ता वाली पैदावार हासिल करने में मदद करता है।"

इस लॉन्चिंग के साथ, गोदरेज एग्रोवेट वैश्विक स्तर की प्रमाणित तकनीकों को भारतीय किसानों के करीब लाकर अपने पोर्टफोलियो को मजबूत करना जारी रखे हुए है, ताकि कृषि पद्धतियों को अधिक कुशल और टिकाऊ बनाया जा सके।

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