Datia By Election: मध्यप्रदेश की हाई-प्रोफाइल दतिया विधानसभा सीट पर एक बार फिर से महासंग्राम की आहट तेज हो गई है। दतिया से पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती से जुड़े बैंक फ्रॉड केस मामले में दिल्ली के उच्च न्यायालय से एक बड़ी खबर सामने आई है। पूर्व विधायक भारती को बड़ा झटका लगा है। मामले की कोर्ट में होने वाली सुनवाई एक बार फिर टल गई है।
तीसरी बार टली राहत
बता दें कि दतिया के को-ऑपरेटिव बैंक से जुड़े करीब 26 साल पुराने फिक्स्ड डिपॉजिट हेराफेरी और धोखाधड़ी के मामले में दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने अप्रैल 2026 की शुरुआत में राजेंद्र भारती को दोषी मानते हुए 3 साल के सश्रम कारावास और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। सुप्रीम कोर्ट के नियमों के तहत 2 साल से अधिक की सजा होने के कारण विधानसभा सचिवालय ने तुरंत अधिसूचना जारी कर उनकी विधायकी शून्य घोषित कर दी थी।
खटखटाया था हाईकोर्ट का दरवाजा
कोर्ट से सजा मिलने के बाद पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने अपनी सदस्यता बहाल कराने और सजा पर रोक लगाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन लगातार तीसरी बार सुनवाई टलने से उन्हें फिलहाल कोई राहत नहीं मिल सकी है। हालांकि, न्यायालय ने आगामी सुनवाई तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक बरकरार रखी है, लेकिन विधायकी रद्द होने के कारण दतिया सीट रिक्त बनी हुई है। अब 14 जुलाई को अगली सुनवाई में फैसला होने की संभावना जताई जा रही है।
दतिया की सियासत में भूचाल
इस कानूनी मोड़ ने दतिया के स्थानीय पावर समीकरणों को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है। साल 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा नेता और पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को धूल चटाने वाले राजेंद्र भारती के अचानक रेस से बाहर होने के बाद, भाजपा खेमे में उत्साह का माहौल है। पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा अपने राजनैतिक वनवास को खत्म करने के लिए दतिया क्षेत्र में लगातार तूफानी दौरे कर रहे हैं और संगठन को मजबूत करने में जुट गए हैं। पार्टी सूत्रों का दावा है कि उपचुनाव घोषित होते ही वे भाजपा के मुख्य चेहरा होंगे।
कांग्रेस का प्लान-B क्या?
दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी अपने गढ़ को बचाने के लिए नए रणनीतिक फॉर्मूले पर काम कर रही है। राजनैतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि कानूनी अड़चनों को देखते हुए राजेंद्र भारती इस बार अपने बेटे या परिवार के किसी सदस्य को कांग्रेस के टिकट पर चुनावी मैदान में उतारने की पैरवी कर रहे हैं।
चुनाव आयोग की बढ़ी सक्रियता
दरअसल, दतिया सीट खाली हुए लगभग दो महीने का समय बीतने को है, ऐसे में नियम अनुसार 6 महीने के अंदर यहां मतदान कराना अनिवार्य है। दिल्ली में चल रही कानूनी रस्साकशी के बीच निर्वाचन आयोग ने भी क्षेत्र के मतदान केंद्रों की समीक्षा और मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का काम शुरू कर दिया है। बहरहाल, अब सबकी नजरें हाईकोर्ट के अगले रुख पर टिकी हैं, क्योंकि कोर्ट के फैसले से ही यह तय होगा कि दतिया में सीधे उपचुनाव का बिगुल बजेगा या राजेंद्र भारती को कोई चमत्कारी राजनैतिक संजीवनी मिल पाएगी।







