डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ मध्यप्रदेश के डिंडोरी जिले के अमरपुर जनपद के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण इलाकों में इन दिनों आसमान से उतरा एक अनोखा मेहमान कौतूहल का विषय बना है। भेसवाही सरई टोला और उमरिया गवारी टोला गांवों में अचानक एक ऐसा गिद्ध दिखाई दिया, जिसके पैरों में एक विशेष नंबर वाला टैग लगा था और उसकी पीठ पर आधुनिक GPS ट्रैकिंग डिवाइस बंधी हुई थी। इस तरह के वैज्ञानिक उपकरणों से लैस पक्षी को पहली बार देखकर ग्रामीणों के बीच तरह-तरह की शंकाएं पैदा होने लगीं। कोई इसे एक रहस्यमयी जीव मान रहा था, तो किसी को इसके पीछे किसी जासूसी या विशेष निगरानी मिशन का अंदेशा था।
खबर डिजिटल को ग्रामीणों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह गिद्ध करीब दो दिनों तक भेसवाहि सरई टोला और उमरिया गवारी टोला के आसमान में मंडराता रहा और बीच-बीच में पेड़ों व मैदानों में बैठता रहा। गिद्ध पर अजीब से उपकरण देखकर ग्रामीणों में उत्सुकता के साथ-साथ एक अनजाना डर भी बैठ गया था। गांव में बढ़ते इस माहौल को देखते हुए तुरंत इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन और वन विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मुस्तैदी के साथ मौके पर पहुंची और पक्षी का बारीकी से निरीक्षण किया।
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मौके पर पहुंचे वन अमले ने ग्रामीणों को पूरी बात समझाते हुए उनके मन में बैठे डर को शांत किया। वन विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि संकटग्रस्त प्रजाति: यह कोई सामान्य या रहस्यमयी पक्षी नहीं है, बल्कि यह धरती पर तेजी से विलुप्त हो रही गिद्ध प्रजाति का एक अहम सदस्य है।इसके पैरों में जो नंबर वाली रिंग या टैग दिख रहा है, वह इसकी विशिष्ट पहचान के लिए लगाया गया है।
इसकी पीठ पर लगा उपकरण कोई कैमरा या जासूसी यंत्र नहीं, बल्कि एक सुरक्षित GPS ट्रैकिंग डिवाइस है। वैज्ञानिक और वन्यजीव विशेषज्ञ इसकी मदद से गिद्धों के उड़ने के मार्ग, उनके ठहरने के पसंदीदा ठिकानों और उनके व्यवहार का बारीकी से अध्ययन करते हैं।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस गिद्ध की लोकेशन से पता चला है कि यह पड़ोसी जिले सिवनी की ओर से उड़कर इस तरफ आया था। संभवतः भोजन की खोज, बदलते मौसम या फिर अपने प्राकृतिक भ्रमण के दौरान यह रास्ता तय करते हुए डिंडोरी के सरई टोला क्षेत्र तक पहुंच गया। ग्रामीणों के बीच दो दिन बिताने और अपनी थकान मिटाने के बाद वह सुरक्षित रूप से अपने अगले सफर पर आगे निकल गया है।
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गिद्ध के शरीर पर बंधे आधुनिक यंत्रों को देखने के लिए गांवों में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इस अनोखे नजारे को अपनी आंखों में कैद कर लेना चाहता था। कई ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने गिद्ध तो पहले भी देखे हैं, लेकिन इतने नजदीक से और आधुनिक तकनीक से लैस किसी पक्षी को देखना उनके लिए जीवन का पहला और बेहद रोमांचक अनुभव था।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि गिद्ध हमारी प्रकृति के सबसे महत्वपूर्ण प्रहरी हैं। ये मृत पशुओं के शवों को खाकर जंगलों और ग्रामीण इलाकों में गंदगी साफ करते हैं, जिससे खतरनाक महामारियां और संक्रमण नहीं फैलते। पिछले कुछ दशकों में दवाओं के जहरीले असर और आवासों की कमी के कारण इनकी संख्या बेहद कम रह गई है। ऐसे में इन पर नजर रखने और इन्हें बचाने के लिए GPS मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकें वरदान साबित हो रही हैं।
इस पूरी घटना ने सरई टोला और उसके आसपास के गांवों के लोगों की सोच में एक बड़ा बदलाव ला दिया है। जिस पक्षी को शुरुआत में ग्रामीण किसी अनहोनी या जासूसी के डर से देख रहे थे, वन विभाग की समझाइश के बाद अब वे उसकी अहमियत समझ चुके हैं। यह घटना अब पूरे क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा और प्रकृति को बचाने में विज्ञान के बेहतरीन उपयोग की एक जीवंत मिसाल बन गई है।
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