डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडोरी जिले की जनपद पंचायत शहपुरा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बड़खेरा में ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर है। विकास कार्यों के नाम पर हुई कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामलों में बार-बार शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई न होने से ग्रामीणों का प्रशासन पर से भरोसा डगमगाने लगा है। ग्रामीण अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं।
कागजों में सिमटीं शिकायतें,
ग्रामीण हर प्रसाद उरैती सहित अन्य नागरिकों ने पंचायत में हुए विभिन्न निर्माण कार्यों में धांधली का आरोप लगाते हुए जनपद से लेकर जिला स्तर तक लिखित शिकायतें सौंपी थीं। ग्रामीणों का आरोप है कि स्टॉप डैम निर्माण, सीसी रोड और नाली निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है। नल-जल योजना के तहत हुए खर्चों और धरातल पर उसकी स्थिति में भारी अंतर है। निर्माण कार्यों से संबंधित बिल-वाउचरों और खर्चों के आंकड़ों में भारी हेरफेर कर सरकारी राशि का बंदरबांट किया गया है। हमने साक्ष्यों के साथ हर स्तर पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी किसी अधिकारी ने मौके पर आकर जांच करना उचित नहीं समझा। प्रशासन की यह चुप्पी भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने जैसी है।
ग्रामीणों का सामूहिक पक्ष
जांच से क्यों बच रहा है प्रशासन? ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते निष्पक्ष जांच की जाती, तो विकास कार्यों का सच सबके सामने आ जाता। लेकिन अधिकारियों की इस सुस्ती ने पंचायत की कार्यप्रणाली के साथ-साथ जिला प्रशासन की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। निर्माण कार्यों और भुगतानों से जुड़े रिकॉर्ड्स की जांच न होने से यह अंदेशा और गहरा गया है कि इस कथित घोटाले के तार ऊपर तक जुड़े हो सकते हैं।
बड़खेरा के आक्रोशित ग्रामीणों ने अब प्रशासन को चेतावनी देते हुए अपनी मांग रखी है कि पंचायत के सभी निर्माण कार्यों और उनसे जुड़े भुगतान संबंधी बिल-वाउचर की उच्च स्तरीय जांच हो। नल-जल योजना और अन्य कार्यों में वित्तीय गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित सरपंच, सचिव और तकनीकी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि शीघ्र ही इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।







