कान्हीवाड़ा (सिवनी)/संतोष वन्देवार/ सिवनी जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत कान्हीवाड़ा इन दिनों भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और प्रशासनिक लापरवाही का अड्डा बनी हुई है। पंचायत में स्थाई सचिव न होने के कारण विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं और समय सीमा पर कोई भी काम पूरा नहीं हो पा रहा है। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के जिम्मेदार पीसीओ और सरपंच की हिटलरशाही के चलते आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मामला कान्हीवाड़ा से मटियाटोला मार्ग का है, जहाँ मात्र 80 हजार रुपये की लागत से एक छोटी पुलिया का निर्माण किया जा रहा है। आश्चर्य और चिंता की बात यह है कि एक महीना बीत जाने के बाद भी यह पुलिया बनकर तैयार नहीं हो सकी है। निर्माण कार्य की धीमी गति और घटिया सामग्री के प्रयोग को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
पुलिया निर्माण अधूरा होने के कारण कान्हीवाड़ा-मटियाटोला मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया है। पंचायत प्रशासन की सबसे बड़ी नाकामी यह रही कि उन्होंने आवागमन के लिए कोई प्रतिदिन इस मार्ग से गुजरने वाले सैकड़ों स्कूली छात्र-छात्राएं जान जोखिम में डालकर या लंबा चक्कर काटकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। रोजमर्रा के काम के लिए निकलने वाले ग्रामीणों और किसानों का संपर्क पूरी तरह कट सा गया है।
पंचायत की इस मनमानी और तानाशाही रवैये से तंग आकर प्राइवेट स्कूल संचालकों और स्थानीय ग्रामीणों ने लामबंद होकर हसीलदार को लिखित आवेदन सौंपा था। हालांकि, आवेदन देने के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से न तो ठेकेदार/पंचायत पर कोई कार्रवाई की गई और न ही निर्माण कार्य में तेजी लाई गई।
यदि जल्द से जल्द पुलिया का निर्माण पूर्ण कर आवागमन बहाल नहीं किया गया और पंचायत के दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।







