डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ मध्य प्रदेश के डिंडौरी, शहपुरा नगर परिषद वित्तीय अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का मामला सामने आया है। एसडीएम कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान पहुंचे शिकायतकर्ताओं ने दस्तावेजों के साथ शिकायत पत्र सौंपते हुए नगर परिषद के जिम्मेदारों पर बड़े पैमाने पर सरकारी राशि के गबन का आरोप लगाया है।
शिकायत में दावा है कि परिषद अधिकारियों ने चहेती फर्मों को लाभ पहुंचाने के लिए फर्जी क्रय आदेश, कूटरचित बिल और झूठे भौतिक सत्यापन पंचनामे तैयार कर 13 लाख 42 हजार 797 रुपये का भुगतान कर दिया, जबकि वास्तव में सामग्री की कोई आपूर्ति ही नहीं हुई थी।
शिकायत में कहा गया है कि नगर परिषद द्वारा जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से साफ-सफाई, रेड इंडिकेटर लार्विसाइड, कीटनाशक पाउडर और टॉयलेट क्लीनिंग पाउडर जैसी सामग्री की खरीदी दिखाई गई थी। आरोप है कि आरटीजीएस (RTGS) और एनईएफटी (NEFT) के जरिए संबंधित फर्मों के खातों में लाखों रुपये ट्रांसफर भी कर दिए गए।
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हालांकि, जब शिकायतकर्ताओं ने 10 नवंबर 2025 को तत्कालीन सीएमओ की मौजूदगी में परिषद के मुख्य स्टोर का आकस्मिक निरीक्षण किया, तो वहां उक्त सामग्री की मौजूदगी शून्य पाई गई। भौतिक रूप से सामान गायब होने के बावजूद अधिकारियों द्वारा सामग्री प्राप्ति और भौतिक सत्यापन का फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कर दिया गया।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कोविड-19 महामारी के बाद नगर परिषद क्षेत्र के किसी भी वार्ड में दवा, फिनाइल या मच्छर मारने वाली दवाओं का कोई छिड़काव नहीं कराया गया है। नगर परिषद के पास इस संबंध में कोई आधिकारिक रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं है।
इस पूरे मामले का पर्दाफाश सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त भुगतान पत्रकों, बैंक स्टेटमेंट और क्रय बिलों के अध्ययन के बाद हुआ। शिकायत में इसे एक सुनियोजित वित्तीय घोटाला बताते हुए पूरे तंत्र की मिलीभगत करार दिया गया है।
प्रशासन को दिए आवेदन में शिकायतकर्ताओं ने मामले की उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही मांग की गई है कि:
तत्कालीन सीएमओ, स्टोर प्रभारी, लेखापाल, सत्यापन समिति के सदस्यों और संबंधित सप्लायर फर्म के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर तत्काल एफआईआर की जाए।
गबन की गई 13.42 लाख रुपये की राशि की वसूली भू-राजस्व (Revenue Recovery) की तर्ज पर की जाए। नगर परिषद शहपुरा के पिछले वर्षों के सभी निर्माण एवं खरीदी कार्यों का एक स्वतंत्र और निष्पक्ष ऑडिट कराया जाए।
वहीं, इस मामले में पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष शालिनी अग्रवाल का कहना है कि यह आरोप पूरी तरह निराधार हैं और उन्हें बदनाम करने की साजिश के तहत लगाए जा रहे हैं।
नगर परिषद के आरोपों के साथ ही ग्राम पंचायत देवरी (छपरा) से भी मनरेगा कार्यों में बड़े पैमाने पर धांधली की शिकायत सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि मनरेगा योजना के तहत स्वीकृत 14 लाख रुपये की लागत वाले तालाब निर्माण में भारी अनियमितताएं की गई हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, जिस स्थान पर नया तालाब निर्मित होना दर्शाया गया है, वहां पहले से ही एक पुराना तालाब मौजूद था। नया काम कराने के बजाय केवल कागजों पर ही निर्माण कार्य की खानापूर्ति कर दी गई। आरोप है कि तालाब निर्माण के तय मापदंडों के अनुसार खुदाई, रोलर संचालन, काली मिट्टी की भराई और रोलिंग का काम जमीनी स्तर पर नहीं हुआ।
इसके बावजूद रोलर संचालन, ईंधन, डीजल और अन्य सामग्रियों के नाम पर फर्जी मूल्यांकन बिल तैयार कर लाखों रुपये का भुगतान ले लिया गया।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराने और फर्जी भुगतानों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।







