भोपाल। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को मध्य प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने के बाद सूबे की सियासत गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस फैसले को मध्य प्रदेश की क्षेत्रीय संस्कृति और गरिमा का अपमान करार दिया है। कांग्रेस पार्टी ने यह घोषणा की है कि पुरी के नामांकन के दिन पार्टी के विधायक और कार्यकर्ता काले झंडे दिखाकर कड़ा विरोध दर्ज कराएंगे।
भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर गंभीर सवाल
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि एपस्टीन फाइल्स में हरदीप सिंह पुरी के नाम का कथित रूप से उल्लेख होने के बाद भी भाजपा ने उन्हें मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजने का फैसला क्यों लिया? पटवारी का कहना है कि गंभीर और संवेदनशील सवालों के घेरे में रहने वाले चेहरे को इस तरह प्रदेश से थोपना कई तरह की शंकाओं को जन्म देता है।
कांग्रेस का मुख्य तर्क है कि जब देश और जनता के स्तर पर पारदर्शी राजनीति की उम्मीद की जाती है, तब ऐसे मामलों में सत्ता पक्ष की चुप्पी कई बड़े इशारे करती है। भाजपा को देश की जनता और खासकर मध्य प्रदेश के मतदाताओं के सामने आकर इस फैसले की वजहों को स्पष्ट करना चाहिए।
मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत की अनदेखी
जीतू पटवारी ने अपने बयान में कहा कि मध्य प्रदेश सिर्फ एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, गौरव और गरिमा की पवित्र भूमि है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने मध्य प्रदेश की इस सांस्कृतिक गरिमा की पूरी तरह से उपेक्षा की है। बाहरी या विवादित समझे जाने वाले चेहरों को राज्य की नुमाइंदगी के लिए थोपना यह दर्शाता है कि केंद्रीय स्तर पर मध्य प्रदेश की भावनाओं को कितनी तवज्जो दी जा रही है। कांग्रेस ने इसे सूबे के स्वाभिमान से जुड़ा हुआ बड़ा मुद्दा बना लिया है।
नामांकन के दिन होगा विरोध
कांग्रेस पार्टी ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। जीतू पटवारी ने आधिकारिक तौर पर यह घोषणा कर दी है कि जिस निर्धारित दिन हरदीप सिंह पुरी अपना नामांकन दाखिल करने के लिए मध्य प्रदेश आएंगे, उस दिन कांग्रेस के सभी विधायक, पदाधिकारी और जमीनी कार्यकर्ता सड़क पर उतरेंगे।
कांग्रेस कार्यकर्ता उन्हें काले झंडे दिखाकर अपना तीव्र विरोध दर्ज कराएंगे। पार्टी का साफ कहना है कि यह विरोध किसी व्यक्तिगत द्वेष के कारण नहीं, बल्कि प्रदेश की गरिमा, जनता के सम्मान और लोकतंत्र में राजनीतिक जवाबदेही को सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है।







