हरदा/नौशाद खान/खबर डिजिटल/ एक ओर सरकार बाल श्रमिकों के संरक्षण के लिए सख्त कानून बना रही है, वहीं दूसरी ओर हरदा जिले में इन कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिले के कई हिस्सों में, खासकर रेलवे स्टेशन परिसर में, ठेकेदारों द्वारा नाबालिग बच्चों से भारी और खतरनाक काम कराया जा रहा है, जबकि जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं।
रेलवे कार्यों में बाल श्रमिकों का शोषण
हरदा रेलवे स्टेशन पर विभिन्न ठेकेदारों के माध्यम से निर्माण व मरम्मत कार्य कराए जा रहे हैं। इन कार्यों में कटनी, सागर सहित अन्य जिलों से मजदूर बुलाए गए हैं, जिनमें नाबालिग बच्चे भी शामिल हैं। गरीबी और मजबूरी के कारण ये बच्चे पढ़ाई छोड़कर परिवार का खर्च चलाने के लिए मजदूरी करने को विवश हैं।
कम मजदूरी, ज्यादा जोखिम
एक 16 वर्षीय बाल मजदूर ने बताया कि उसे सप्ताह भर के कठिन श्रम के बदले मात्र 1500 रुपये दिए जाते हैं। बच्चों से सब्बल, हथौड़ा जैसे औजारों से काम कराया जा रहा है। जिन हाथों में किताब-कलम होनी चाहिए, उनमें भारी औजार थमा दिए गए हैं।
नियमों की अनदेखी और खतरनाक काम
प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर लिफ्ट के पास एक स्थानीय ठेकेदार द्वारा घरेलू गैस सिलेंडर से लोहे की कटिंग कराई जा रही है, जो न केवल नियमों के खिलाफ है बल्कि जानलेवा भी है। यहां भी बाल श्रमिक काम करते पाए गए।
श्रम विभाग की निष्क्रियता
सूचना देने के बावजूद श्रम विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यदि नियमित निरीक्षण होता, तो शायद यह स्थिति न बनती।
क्या कहता है कानून
बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 व 2016 संशोधन के अनुसार 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम कराना प्रतिबंधित है, वहीं 14 से 18 वर्ष के किशोरों को खतरनाक कार्यों में लगाना अपराध है। इसके बावजूद हरदा में कानून केवल कागजों तक सीमित नजर आ रहा है।







