छत्तीसगढ़ में पुलिस महकमे के शीर्ष पद को लेकर लंबे समय से चल रही असमंजस की स्थिति अब खत्म होती नजर आ रही है. पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियमित नियुक्ति को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बढ़ रहा है और संकेत मिल रहे हैं कि जल्द ही इस पद पर स्थायी नियुक्ति की घोषणा हो सकती है. दरअसल, यह मामला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि कानूनी रूप से भी अहम हो गया है. सुप्रीम कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि राज्यों में ‘प्रभारी’ डीजीपी की व्यवस्था लंबे समय तक नहीं चल सकती और तय प्रक्रिया के तहत ही नियमित नियुक्ति की जानी चाहिए. इसी के चलते संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने भी राज्य सरकार से इस मामले में जवाब मांगा था कि अब तक स्थायी नियुक्ति क्यों नहीं की गई.
सूत्रों के अनुसार, दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों पर लगातार चर्चा हो रही है. इनमें 1992 बैच के अरुण देव गौतम और 1994 बैच के हिमांशु गुप्ता का नाम शामिल है. इन दोनों में से अरुण देव गौतम का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरकर सामने आ रहा है. उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव और विभिन्न अहम जिम्मेदारियों को निभाने की क्षमता को देखते हुए उनका पलड़ा भारी माना जा रहा है .बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने करियर के दौरान कई संवेदनशील क्षेत्रों में काम किया है और कानून-व्यवस्था संभालने में उनकी अच्छी पकड़ रही है.
गौरतलब है कि पूर्व डीजीपी अशोक जुनेजा के रिटायर होने के बाद अरुण देव गौतम को प्रभारी डीजीपी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. हालांकि, यह व्यवस्था अस्थायी थी और अब इसे स्थायी नियुक्ति में बदलने की प्रक्रिया तेज हो गई है. ऐसे में यह माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही अंतिम फैसला लेकर नए डीजीपी के नाम पर मुहर लगा सकती है. इस पूरे घटनाक्रम के पीछे सुप्रीम कोर्ट की सख्ती भी एक बड़ा कारण है.हाल ही में हुई सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए थे कि नियुक्तियों में देरी को गंभीरता से लिया जाएगा और इसके लिए जवाबदेही तय की जा सकती है.यही वजह है कि अब राज्य सरकार भी इस मामले को लेकर तेजी दिखा रही है.







