चंदेरी। नगर पालिका परिषद चंदेरी में ठेकेदारों के लंबित भुगतान और कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। एक तरफ ठेकेदार मोनू पुरोहित का दावा है कि उनके एक करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान लंबे समय से अटका हुआ है, तो वहीं दूसरी ओर मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) प्रदीप शर्मा के बयानों ने पुरानी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वैध वर्क ऑर्डर और फाइलों पर उलझा पेच
हाल ही में सीएमओ प्रदीप शर्मा ने स्पष्ट किया था कि संबंधित ठेकेदार की फाइलों में वैध वर्क ऑर्डर और हस्ताक्षर मौजूद नहीं हैं। वहीं, ठेकेदार का कहना है कि वे वर्ष 2019 से नगर पालिका के विभिन्न आयोजनों में टेंट, लाइट और अन्य व्यवस्थाएं देते आ रहे हैं और उनके पास सभी आवश्यक चीच उपलब्ध हैं। इस विरोधाभास ने नगरपालिका की कार्यशैली को कटघरे में ला खड़ा किया है।


पुराने भुगतानों और जवाबदेही पर सवाल
मामले का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि यदि नगर पालिका में पहले से ही फर्जी या संदिग्ध फाइलें तैयार होने की समस्या रही है, तो यह सब किसके संरक्षण में चल रहा था? पूर्ववर्ती अध्यक्षों, तत्कालीन सीएमओ और हस्ताक्षर करने वाले अधिकारियों की भूमिका पर अब जांच की मांग उठ रही है। क्या पहले भी बिना वैध दस्तावेजों के भुगतान किए गए हैं? जब इस संबंध में संवाददाता ने सीएमओ से रिकॉर्डेड बयान और जानकारी चाही, तो उन्होंने कुछ भी कैमरे पर बोलने से इनकार कर दिया, जिससे संदेह और गहरा गया है।
ईओडब्ल्यू और उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग
यह पूरा प्रकरण केवल एक ठेकेदार के भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक धन की पारदर्शिता से जुड़ा है। स्थानीय नागरिकों और जानकारों ने मांग की है कि आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW), जिला कलेक्टर अशोकनगर और नगरीय प्रशासन विभाग को इस मामले का स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।
जांच में मुख्य रूप से इन बिंदुओं को शामिल किया जाना चाहिए:
- वर्ष 2019 से अब तक तैयार सभी संदिग्ध भुगतान फाइलों की स्वतंत्र जांच हो।
- तत्कालीन व वर्तमान सीएमओ तथा संबंधित अध्यक्षों की भूमिका तय की जाए।
- बिना वर्क ऑर्डर या सत्यापन के हुए भुगतानों की पहचान कर विशेष ऑडिट कराया जाए।
- दोषियों के खिलाफ कड़ी विभागीय व कानूनी कार्रवाई हो।







