Jaggi Murder Case: छत्तीसगढ़ के चर्चित जग्गी हत्याकांड में आज बड़ा फैसला आया हैं। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने तीन सप्ताह के अंदर सरेंडर करने का निर्देश दिया है।
HC के फैसले से बढ़ी मुश्किलें
अदालत ने सीबीआई की अपील को स्वीकार करते हुए यह आदेश जारी किया है। इस फैसले के बाद अमित जोगी की कानूनी मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। जग्गी हत्याकांड, जिसने सालों तक प्रदेश की राजनीति को गरमाए रखा, उसमें इस नए आदेश ने एक बार फिर हलचल तेज कर दी है।
अमित जोगी का पलटवार
अदालत के आदेश के तुरंत बाद अमित जोगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस फैसले को 'अन्याय' करार देते हुए न्यायपालिका की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। जोगी ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि "प्रिय मित्रों, आज माननीय उच्च न्यायालय ने मेरे विरुद्ध CBI की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया—वह भी बिना सुनवाई का अवसर दिए। यह पूरी तरह अप्रत्याशित है कि जिस व्यक्ति को पहले दोषमुक्त किया गया था, उसे बिना पक्ष रखे दोषी मान लिया गया।"
सुप्रीम कोर्ट जाएंगे जोगी
अमित जोगी ने स्पष्ट किया है कि वे इस फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील करेंगे। उन्होंने छत्तीसगढ़ की जनता से आशीर्वाद और प्रार्थना की अपील करते हुए कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है और 'सत्य की जीत' होगी।
बचाव पक्ष का कहना…
वहीं बचाव पक्ष का कहना है कि अभियुक्तों के भी न्याय व्यवस्था में अधिकार होते हैं और उन्हें पर्याप्त सुनवाई का मौका मिलना चाहिए। बताया जा रहा है कि करीब 12 हजार पन्नों की अपील देर से प्राप्त हुई, जिसके चलते समय की मांग की गई थी,लेकिन हाई कोर्ट ने सिर्फ 24 घंटे का समय दिया,और इसके बाद फैसला सुना दिया गया। बचाव पक्ष ने साफ कर दिया है कि अब इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। उनका कहना है कि इस फैसले से कई आरोपियों को राहत की उम्मीद जगी है, और उन्हें भरोसा है कि सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल सकती है। फिलहाल, इस हाई-प्रोफाइल केस में आने वाले दिनों में कानूनी लड़ाई और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।







