कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलने की अटकलों के बीच छत्तीसगढ़ की पुरानी राजनीतिक चर्चा फिर से तेज हो गई है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हाल ही में साफ किया कि कांग्रेस नेतृत्व ने उनसे कभी इस्तीफा नहीं मांगा था. उनके इस बयान के बाद एक बार फिर 2018 के बाद चर्चित रहे ‘ढाई-ढाई साल फॉर्मूला’ को लेकर सियासी बहस शुरू हो गई है.
भूपेश बघेल ने क्या कहा
दरअसल, कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पद छोड़ने की चर्चाओं ने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को फिर चर्चा में ला दिया है. इसी माहौल के बीच रायपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए भूपेश बघेल ने अपने कार्यकाल के शुरुआती दिनों को याद किया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के पहले दिन से ही उनसे लगातार यह सवाल पूछा जाता था कि क्या वे केवल ढाई साल के लिए ही इस पद पर हैं.
पार्टी हर बात का करती है सम्मान
बघेल ने कहा कि उन्होंने हमेशा पार्टी नेतृत्व के फैसलों का सम्मान किया और अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाई. उनका कहना था कि अगर कांग्रेस हाईकमान की तरफ से एक बार भी पद छोड़ने का निर्देश मिलता, तो वे तुरंत इस्तीफा देने के लिए तैयार थे. हालांकि पांच साल के पूरे कार्यकाल में उनसे कभी ऐसा नहीं कहा गया.
पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार अफवाहें फैलाने में लगा रहा. उनका कहना था कि भाजपा ने कांग्रेस सरकार के भीतर अस्थिरता का माहौल दिखाने की कोशिश की, ताकि जनता के बीच भ्रम पैदा हो सके. बघेल ने कहा कि पार्टी ने उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी थी, उसे उन्होंने पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाया.
बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
वहीं भाजपा नेताओं ने भी इस बयान को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला है. भाजपा का कहना है कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के दौरान सत्ता संघर्ष और अंदरूनी खींचतान लगातार दिखाई देती रही. उनका दावा है कि प्रदेश की जनता ने भी पूरे कार्यकाल में यह स्थिति साफ तौर पर देखी.
भूपेश बघेल का यह बयान है अहम
कर्नाटक की मौजूदा राजनीतिक हलचल के बीच भूपेश बघेल का यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे छत्तीसगढ़ कांग्रेस के उस पुराने विवाद की चर्चा फिर तेज हो गई है, जिसने लंबे समय तक राज्य की राजनीति को प्रभावित किया था. अब यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है.







