भोपाल। मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण SIR अभियान और उसमें सामने आ रही कथित अनियमितताओं को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने भोपाल पहुंचकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात की और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पूर्व मंत्री व एसआईआर कमेटी के अध्यक्ष सज्जन सिंह वर्मा ने किया।
ड्राफ्ट सूची निरस्त करने और फॉर्म-6 के प्रयोग पर जोर
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में पात्र नागरिकों के नाम सूची से गायब कर दिए गए हैं। प्रतिनिधिमंडल ने 22 फरवरी 2026 को प्रकाशित की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची को तुरंत प्रभाव से निरस्त करने की मांग की। इसके साथ ही, उन्होंने जोर दिया कि जो पात्र नागरिक किसी कारणवश फॉर्म-6 भरने से वंचित रह गए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर नया अवसर देते हुए सूची में जोड़ा जाए।
नाम हटाने का विरोध
ज्ञापन के माध्यम से कांग्रेस ने वर्ष 2003 के रिकॉर्ड उपलब्ध न कराने और लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी (तार्किक विसंगतियों) का हवाला देकर हटाए गए मतदाताओं का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। नेताओं का कहना था कि बिना उचित सुनवाई के आम नागरिकों को मताधिकार से वंचित करना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने मांग की कि प्रभावित लोगों को पक्ष रखने का पर्याप्त समय दिया जाए और उसके बाद ही अंतिम सूची का प्रकाशन हो।
मतदान प्रक्रिया और फॉर्म-7 के दुरुपयोग पर रोक की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने फॉर्म-7 के संभावित दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए इसे दाखिल करने का सर्वाधिकार केवल बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) तक सीमित रखने की बात कही। इसके अतिरिक्त, चुनाव प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से आगामी सभी चुनाव मतपत्र (बैलेट पेपर) के जरिए कराने की पुरानी मांग को दोहराया।
कौन- कौन रहे मौजूद
इस दौरान सज्जन सिंह वर्मा के साथ जे.पी. धनोपिया, ललित सैन, इरफान खान, आरिफा खान, अनोखी मानसिंह पटेल, प्रवीण सक्सेना और मनोज राजानी सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष लोकतंत्र के लिए मतदाता सूची की शुद्धता अनिवार्य है और यदि जनता के अधिकारों की अनदेखी हुई, तो पार्टी इस लड़ाई को आगे बढ़ाएगी।







