खबर डिजिटल न्यूज़ रिपोर्टर /कटनी-- बरही थाना एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। जिले के ग्राम झिरिया बैकोना टोला की आदिवासी महिला ऊषाबाई भूमिया ने पुलिस अधीक्षक को दिए शिकायत पत्र में ऐसे आरोप लगाए हैं, जिन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला केवल पुलिसिया लापरवाही नहीं बल्कि कानून के रखवालों द्वारा कानून को ही कठघरे में खड़ा करने जैसा माना जाएगा।पीड़िता का आरोप है कि उसके ससुर चुन्दुल भूमिया के साथ मारपीट कर उन्हें कथित रूप से एसिड जैसा पदार्थ पिलाया गया, जिसके बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिवार का कहना है कि घटना की जानकारी और शिकायत के बावजूद बरही पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ समय रहते एफआईआर दर्ज नहीं की। आरोप है कि राजनीतिक और रसूखदार लोगों के दबाव में पुलिस पूरे मामले को दबाने में जुटी रही।शिकायत के अनुसार, जब परिवार ने न्याय की गुहार लगाते हुए पुलिस अधीक्षक का दरवाजा खटखटाया, तो न्याय मिलने के बजाय उन्हें प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। महिला का आरोप है कि 12 जुलाई को बरही पुलिस उसे और उसके पति को घर से उठाकर थाने ले गई, जहां घंटों तक बैठाने के बाद अलग कमरे में ले जाकर अमानवीय तरीके से मारपीट की गई। शिकायत में रस्सी से बांधकर पीटने, कपड़े उतरवाकर प्रताड़ित करने और झूठा अपराध कबूल कराने के लिए दबाव बनाने जैसे बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं।महिला ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने यह कबूल करवाने की कोशिश की कि उसी ने अपने ससुर को एसिड पिलाया था। इतना ही नहीं, मारपीट के बाद दबावपूर्वक वीडियो और लिखित बयान भी दर्ज कराए गए। पीड़िता का यह भी कहना है कि डॉक्टर के सामने चोटों का कारण बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।पूरे मामले में तत्कालीन टीआई अरविंद कुमार चौबे और एसडीओपी वीरेन्द्र सिंह धारवे के खिलाफ भी प्रताड़ना, मारपीट और दबावपूर्वक बयान लेने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के साथ मेडिकल दस्तावेज और कथित चोटों के फोटो भी पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए हैं।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि एक आदिवासी परिवार को न्याय मांगने की कीमत थाने में कथित प्रताड़ना के रूप में चुकानी पड़े, तो आम नागरिक आखिर किस पर भरोसा करे? क्या आरोपियों को बचाने के लिए पीड़ित परिवार पर ही दबाव बनाया गया? क्या बरही थाना कानून लागू करने के बजाय प्रभावशाली लोगों के संरक्षण का केंद्र बन गया है?पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, आरोपियों के खिलाफ हत्या सहित उचित धाराओं में कार्रवाई, संबंधित पुलिस अधिकारियों की स्वतंत्र जांच तथा अपने परिवार की सुरक्षा की मांग की है।Barhi Police Torture Allegations After SP Complaint: Tribal Woman Accuses Cops of Brutality in काटने
एसपी से शिकायत की सजा? बरही थाने में आदिवासी महिला से बर्बरता का आरोप, पुलिस पर आरोपियों को बचाने के गंभीर आरोप
Khabar Digital Desk
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