सावन भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र महीना माना जाता है. इस दौरान पूजा के कुछ विशेष नियम बताए गए हैं. इनमें शिवलिंग पर तुलसी अर्पित न करने की परंपरा भी शामिल है. आइए जानते हैं इसके पीछे की धार्मिक मान्यता और सावन में पूजा से जुड़े महत्वपूर्ण नियम.
सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और साधना के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है. इस पूरे माह में शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और भक्त जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, व्रत तथा विशेष पूजा-अर्चना कर महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रावण मास में पूरे श्रद्धा भाव और नियमों के साथ की गई शिव पूजा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है.
हालांकि शिव पूजा से जुड़े कुछ ऐसे नियम भी हैं जिनका पालन करना आवश्यक माना गया है. इन्हीं में से एक नियम भगवान शिव को तुलसी दल अर्पित न करने का है. धार्मिक कथाओं के अनुसार तुलसी का पूर्व जन्म वृंदा के रूप में हुआ था. वृंदा के पति जालंधर का वध भगवान शिव ने किया था. इसी कारण तुलसी और शिव पूजा को एक साथ नहीं जोड़ा जाता. यही वजह है कि शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, आक, भांग और गंगाजल चढ़ाने का विधान है, लेकिन तुलसी अर्पित नहीं की जाती.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में ब्रह्म मुहूर्त के समय भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है. इस समय किया गया जलाभिषेक और मंत्र जाप विशेष फलदायी माना जाता है. साथ ही इस पूरे महीने सत्य बोलने, क्रोध से बचने, संयम रखने और सात्विक जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है. मांसाहार और नशीले पदार्थों से दूरी बनाकर रखना भी शुभ माना जाता है.
वास्तु शास्त्र के अनुसार सावन के दौरान घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को साफ और पवित्र रखना चाहिए. माना जाता है कि इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है.
स्कंद पुराण में श्रावण मास को भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना बताया गया है. मान्यता है कि इस माह का प्रत्येक दिन और प्रत्येक तिथि विशेष पुण्य देने वाली होती है. इसी महीने महर्षि मार्कंडेय ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव की कृपा प्राप्त की थी, जिसके कारण उन्हें दीर्घायु का वरदान मिला. इसलिए सावन में शिव आराधना को अकाल मृत्यु से रक्षा और लंबी आयु का प्रतीक भी माना जाता है.
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना वह समय भी है जब भगवान शिव माता पार्वती के साथ पृथ्वी पर अपने ससुराल आते हैं. इसी कारण भक्त जलाभिषेक और विशेष पूजा के माध्यम से उनका स्वागत करते हैं. माना जाता है कि जो श्रद्धालु पूरे सावन नियम, संयम और भक्ति के साथ महादेव की आराधना करता है, उस पर भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है.
सावन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि मानसिक और प्राकृतिक दृष्टि से भी बेहद खास माना जाता है. चारों ओर फैली हरियाली और शुद्ध वातावरण मन को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है. वहीं शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा कर इलायची अर्पित करने और बाद में उसे तिजोरी या पर्स में रखने का उपाय भी कई लोग आर्थिक सुख-समृद्धि के लिए शुभ मानते हैं. सावन का यह पावन महीना आध्यात्मिक उन्नति, सकारात्मक सोच और जीवन में नई ऊर्जा का संदेश देता है.







